आंकड़ों का शिक्षण

प्राथमिक स्‍कूल में गणित के अन्‍तर्गत पढ़ाए जाने वाले सभी प्रसंग (topic) बच्‍चों की अपनी दुनिया को समझने की जरूरत से उत्‍पन्‍न होते हैं। इस समझ को बनाने व बढ़ाने की प्रक्रिया के दौरान बच्‍चों का सामना विविध प्रकार के संख्‍यात्‍मक आँकड़ों (डेटा) से होता है। समान तरह के अन्‍य संख्‍यात्‍मक आँकड़ों के सम्‍बन्‍ध में देखने पर अक्‍सर इन आँकड़ों का महत्‍वपूर्ण अर्थ होता है। जब आँकड़ों को एक अर्थपूर्ण तरीके से व्‍यवस्थित किया जाता है और ग्राफ के रूप में प्रस्‍तुत किया जाता है तो समानताएँ व विभिन्‍नताएँ स्‍पष्‍ट रूप से समझ आती हैं। आँकड़ों की तुलना की जा सकती है और पैटर्न का अवलोकन कर उपयोगी निष्‍कर्षों पर पहुँचा जा सकता है।

आज के समय में आँकड़ों की भरमार है और इनमें से अधिकांश आँकड़े ग्राफ के रूप में प्रस्‍तुत किए जाते हैं। ग्राफ संचार का एक तरीका बन गया है। आँकड़ों को ग्राफ के रूप में प्रस्‍तुत करने का कौशल, ग्राफ को सही ढंग से पढ़ना व उसकी व्‍याख्‍या करना और उसकी सीमाओं को जानना अब बहुत महत्‍वपूर्ण हो गया है।
इस विषय को पढ़ाते समय यह सुनिश्चित करना महत्‍वपूर्ण है कि आँकड़ों को ग्राफ के रूप में प्रस्‍तुत करने को अपने आप में अन्‍त नहीं समझा जाए। आदर्श रूप में एक ग्राफ को महत्‍वपूर्ण अवलोकनों में परिणित होना चाहिए। एक बार जब ग्राफ बन जाए तो जिस अहम सवाल को कक्षा में उठाना चाहिए व उस पर चर्चा की जानी चाहिए वह है कि ‘यह ग्राफ क्‍या कहता है?’ इसका एक खुला हुआ पहलू भी है। साथ ही इस्‍तेमाल किए जाने वाले आँकड़े वास्‍तविक व अर्थपूर्ण होने चाहिए और उपयोगी ग्राफ कार्य करने के लिए अवसर प्रदान करने वाले होने चाहिए।  


At Right Angles (a resource for school mathematics) Volume 5 ,N0.3 Nov 2016 Pullout : Teaching Data Handling  का हिन्‍दी अनुवाद

आँकड़ों के प्रबन्‍धन का शिक्षण 
पद्मप्रिया शिराली

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