शिक्षा में नवाचार

By Madhav Patel | अगस्त 5, 2018

नवाचार(नव+आचार) अर्थात नया विधान का अर्थ किसी उत्पाद प्रक्रिया या सेवा में थोड़ा या कुछ बड़ा परिवर्तन लाने से है नवाचार के अंतर्गत कुछ नया और उपयोगी अपनाया जाता है जैसे कोई नई विधा या नई तकनीक | प्रत्येक वस्तु या क्रिया में परिवर्तन प्रकृति का नियम है परिवर्तन से ही विकास के चरण आगे बढ़ते है परिवर्तन एक जीवंत गतिशील एवं आवश्यक प्रक्रिया है जो समाज को वर्तमान व्यवस्था के प्रति और अधिक व उपयोगी तथा सार्थक बनाती है इन्हीं सब से नवचेतना और उत्सुकता का संचार होता है इसकी प्रक्रिया विकासवादी और नावगत्यात्मक होती है परिवर्तन और नवाचार एक दूसरे के पारस्परिक पूरक या पर्याय है "नवाचार कोई नया कार्य करना ही मात्र नही है वरन किसी भी कार्य को नए तरीके से करना भी नवाचार है "
     व्यक्ति और समाज मे हो रहे परिवर्तनो का प्रभाव शिक्षा पर भी पड़ा है शिक्षा को से।समयानुकूल बनाने के लिए शैक्षिक विधाओ में नवाचार ने अपनी उपयोगिता और सार्थकता स्वयं सिद्ध कर दी है  ट्रायटेन के अनुसार -"शैक्षिक नवाचारों का उद्भव स्वतः नही होता बल्कि उन्हें खोजना पड़ता है तथा सुनियोजित तरीके से इन्हें प्रयोग में लाना होता है ताकि शैक्षिक कार्यक्रमो को परिवर्तित परिवेश में गति मिल सके और परिवर्तन के साथ गहरा तारतम्य बनाये रख सके " इस प्रकार नवाचार एक नवीन विचार है एक व्यवहार है अथवा वस्तु या फिर कोई नया तरीका है जो नवीन और वर्तमान का गुणात्मक स्वरूप है नवाचार की परिस्थितिया हर क्षेत्र में अलग अलग अर्थ बताती है इनके प्रयोग के तरीके भी अलग अलग रूप में प्रयोग लाये जाते है प्रोफेसर उदय पारिख एयर टी.पी. राव ने नवाचार को कुछ इस तरह परिभाषित किया है-"किसी उपयोगी कार्य के लिए किसी व्यक्ति या निकाय के द्वारा किया गया विचार अथवा अभ्यास नवाचार कहलाता है" सभी कार्य ऐसे होते है जो पहले कही न कही किसी न किसी के द्वारा पूर्व में किये जा चुके है परंतु आपने पूर्व में किये कार्य को यदि अपनी नई रचनात्मक शैली प्रदान की है तो यही प्रयास नावचार बन जाता है
      हमारे सामने एक बात आती है कि नवाचार की आवश्यकता क्यों है तत्सम्बन्ध में ये राबर्ट मर्डोक का कथन कहा जा सकता है कि "दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है अब बड़े छोटो को हरा नही पायेंगे अब जो तेज है वो धीमे को हराएंगे" यदि हम अपने छात्रों की उन्नति करनी है तो हमे छात्रों का नामांकन उपस्थिति और ठहराव बढ़ाने के साथ साथ ही रोचक शिक्षण की पद्धतियों में परिवर्तन लाना ही होगा जिस प्रकार आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है ठीक उसी प्रकार आज शिक्षण पद्धतियों में बदलाव छात्रों को विद्यालय लाने के तरीकों में परिवर्तन लाजिमी है शिक्षको का मधुर बर्ताव छात्रों के प्रति सुखद व सकारात्मक व्यवहार शैक्षिक लक्ष्यों की प्राप्ति में एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाहन करते है |
                      जगजाहिर है कि कुछ बदलाव करने के लिए समाज की बेहतरी के लिए जो ठोस कदम उठाए जाते है जो नवाचार प्रयोग में लाये जाते है आरंभ में कठिन मेहनत तो करनी पड़ती है कुछ कठनाइयों का सामना भी करना पड़ता है इसका आशय ये कतई नही कि हम नई पद्धतियों न स्वीकारे क्योंकि अंत मे सफलता मिलनी तय है नवाचार में या तो सफलता मिलेगी नही तो नया अनुभव अवश्य ही मिलेगा जो आगामी रणनीति में उपयोगी होगा हमे परंपरागत विधियों का अतिरिक्त नवीन विधाओ को अपनाना होगा क्योंकि परिवर्तन सार्वभौमिक सत्य है महान वैज्ञानिक डार्विन का यह नियम की "प्रकृति उन्ही को जीने का अधिकार देती है  जो जीवन संघर्ष में सफल होते है" लगभग सभी जगह लागू होता है इसलिए स्वयं के अस्तित्व की खातिर हमे नवाचार स्वीकारने ही होंगे 
                    विद्यालयों में सीखने सीखने की प्रक्रिया प्रभावी रूप से सम्पन्न करने में सबसे महत्वपूर्ण होती है विद्यार्थियों की उपस्थिति विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए वैसे तो सरकार अनेक योजनाएं संचालित कर रही है फिर भी प्रायः अधिकांश जगह ये देखने को आता है कि विद्यालयो में छात्रों की उपस्थिति संतोषजनक नही रहती इसमें सुधार के जो तरीके बेहतर हो सकते है वो ये हो सकते है
साप्ताहिक पुरुस्कार= इसके अंतर्गत प्रत्येक विद्यालय में हर शनिवार को बालसभा के दौरान ऐसे छात्रों को पुरस्कृत किया जाना चाहिए जिनकी साप्ताहिक उपस्थित सर्वाधिक रही हो एक से अधिक ऐसे छात्र होने पर ड्रा के माध्यम से भी निर्णय किया जा सकता है या फिर सभी सामान उपस्थिति वाले छात्रों को पुरस्कृत किया जा सकत है साथ ही ऐसे छात्रों के नाम विद्यालय के सूचना पटल पर प्रदर्शित होते रहे तथा प्रार्थनासभा या अन्य विद्यालयी गतिविधियों में आगे रहने अवसर मिलने चाहिए जिससे दूसरे छात्र प्रेरणा ले

शाला प्रबंधन समिति प्रोत्साहन=  जो प्रक्रिया साप्ताहिक सर्वाधिक उपस्थिति के छात्रों के साथ अपनायी गई है वही मासिक उपस्थित के संबंध में दुहराई जा सकती है कि जिस छात्र की उपस्थिति माह में सर्वाधिक होगी उसके लिए शाला प्रबंधन समिति की मासिक बैठक में पुरुस्कृत किया जाएगा जिससे सभी विद्यार्थियों में स्वास्थ्य प्रतिस्पर्धा जन्म लेगी और विद्यालय की उपस्थिति में इजाफा होगा
पालक सम्मान= विद्यालयों में आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह में विद्यालयों द्वारा ऐसे अभिभावकों का सम्मान जनप्रतिनिधियों के माध्यम से किया जाना चाहिए जिनके छात्र/छात्रा की उपस्थिति सम्पूर्ण शैक्षिक वर्ष में सर्वाधिक रही हो साथ इसका प्रमाण पत्र भी संबंधित को दिया जाना चाहिए साथ ही कोई स्मृति चिन्ह आदि भी अभिभावक को दिया जाए जिससे कार्यक्रम में उपस्थित अन्य अभिभावकों पर इसका सकारात्मक और प्रेरणादायी प्रभाव पड़े
पीले चावल योजना= प्रत्येक विद्यालय में ऐसे छात्रों की सूची होती है जो विद्यालय नही आते या अनियमित आते है इन छात्रों को नियमित विद्यालय लाने के लिए शाला परिवार द्वारा इनके पालको को पीले चावल देकर अपने पाल्यो सहित विद्यालय आमंत्रित किया जाना चाहिए क्योंकि पीले चावल देकर निमंत्रण देने का अपना अलग ही महत्व होता है यदि किसी को पीले चावल का निमंत्रण कोई अस्वीकार नही कर सकता और उसे आमंत्रण के बाद आना ही होता है तो विद्यालय में ऐसे पालको को विशेष समझाया जा सकता है और ये कदम विद्यालय में उपस्थिति बढ़ाने में सहयोगी साबित हो सकता है
बालकेविनेट सहयोग योजना=  विद्यालय में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने में बालकेबिनेट की भूमिका निर्णायक हो सकती है यदि इसका उपयोग सही तरीके से किया जावे इस हेतु बालकेबिनेट के प्रधानमंत्री और अन्य साथी मंत्री अपने अपने उत्तदायित्व के अतिरिक्त विद्यालय न आने वाले छात्रों से संपर्क करेगे जिससे उनके न आने के वास्तविक कारणों को ज्ञात किया जा सकेगा तथा इस योजना के तहत जो छात्र नही आ रहे है उनको लाने के लिए उनके आसपास के छात्र उनको लेने के लिए समूह बनाकर उनके घर जाया करेगे जिससे उनके घर वालो को भी छात्र के न जाने की पुष्टि तो होगी ही साथ ही अपने पाल्यो को विद्यालय भेजने की लालसा जागृत होगी इसके अतिरिक्त छात्रों को अपने सहपाठियों का साथ भी मिल जाएगा

जागरूक नागरिक समिति= वैसे तो प्रत्येक विद्यालय के सफल और सुचारू संचालन के लिए शाला प्रबंधन समिति सक्रिय है परंतु गठन की अपनी सीमाएं है जिनके बालक/बालिकाएं अध्यनरत होते है केवल वही समिति के सदस्य होने की पात्रता रखते है अन्य नही जबकि गांव में ऐसे अनेक गणमान्य लोग रहते है जो अभिभावक तो नही होते परंतु सामाजिक रूप से बहुत ही प्रभाबी होते है जिनकी बात किसी को भी टालना आसान नही होती ऐसे लोगों का सक्रिय सहयोग लेकर विद्यालय की उपस्थिति आसानी से  बड़ाई जा सकती है इसके लिए जागरूक समिति गठित की जा सकती है जो उनको भी विद्यालय का सदस्य होने का बोध कराएगी और वो ऐसे पालको से संपर्क करेगे जिनके छात्र/छात्राएं नियमित नही आते ये समिति अपने स्तर पर ऐसे लोगो को अपने पाल्यों को विद्यालय भेजने को प्रेरित करेगी साथ विद्यालय के संचालन जैसे शिक्षकों की नियमितता समयबद्धता मध्यान्हभोजन आदि की भी गुणबत्ता जांचेगी जिससे पालको पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा 
मासिक भ्रमण:- ये मानवीय प्रबृत्ति होती है कि व्यक्ति एक ही स्थान या एक ही कार्य से नीरसता महसूस करने लगता है हमारे विद्यार्थी भी इस सहज प्रक्रम से अछूते नही रह सकते उनको इससे बचाने के लिए जरूरी है कि उनको कुछ नयापन दिया जावे इसके हम छात्रों को आसपास के खेत,खलियान, पार्क,पुराने किले,पोखर,तालाब आदि का अवलोकन ,भ्रमण कराए इसके लिए प्रथक से राशि की आवश्यकता भी नही होगी क्योंकि भ्रमण हमे स्थनीय स्थलों का करवाना है इससे उनको आसपास की जैव विविधता ,परिवेष, पर्यावरण की जानकारी मिल जाएगी व मन भी प्रसन्न हो जाएगा और हमारे विद्यालय की उपस्थिति भी बढ़ जाएगी
आनंददायी शिक्षण:= आनंददायी शिक्षण ऐसा प्रक्रम है जिसमे हैं छत्रों की रुचि अनुसार बिना मानसिक दबाव डाले सहज तरीके के शिक्षण करवा कर विद्यालय की छात्र उपस्थिति बड़ा सकते है इन तरीकों को अपनाकर हमारा शिक्षण भी रोचक हो जायेगा इसके लिए शासन स्तर से भी कुछ गतिविधियां प्रस्तावित की गई है जो हमारा मार्गदर्शन करती है हम इसमें क्षैत्रिय परिवेशनुसार आवश्यक गतिविधियों को जोड़कर छात्र संख्या में उल्लेखनीय बृद्धि कर सकते है Madhav Patel

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