राष्ट्रीय एकता दिवस

By Madhav Patel | अक्टूबर 30, 2020

आधुनिक भारत के शिल्पी,राष्ट्रीय एकीकरण के सूत्राधार,कुशल संगठक,भारतरत्न, लौहपुरुष सरदार बल्लभभाई पटेल का जन्म31 अक्टूबर 1875 को ग्राम करमसद में हुआ था। इनके पिता झबेरभाई पटेल थे। इनकी मां का नाम लाडोबाई था। इनके पिता बहुत ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे।वल्लभभाई की आगे की शिक्षा बहुत ही संघर्षों के साथ पूरी हुई तथा इंग्लैंड में जाकर पूरी हुई तथा बैरिस्टरी की परीक्षा उत्तीर्ण की।भारत के राजनीतिक इतिहास में सरदार पटेल के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। 1926 में उनकी भेंट गांधी जी से भेंट के बाद स्वाधीनता आंदोलन से जुड़ गए। बारडोली में किसान आंदोलन का सफल नेतृत्व करने के कारण उनका नाम सरदार पड़ा। वे स्पष्ट व निर्भीक वक्ता थे और किसी से असहमत होने पर स्पष्ट बोल देते थे।आजादी की लड़ाई में वे कई बार जेल गये। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें सजा भी हुई थी।देश की आजादी के बाद गृहमंत्री बनने के बाद भारतीय रियासतों के विलय की जिम्मेदारी उनको ही सौंपी गई थी। उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए 562 छोटी-बड़ी रियासतों का भारत में विलय कराया हैदराबाद और जूनागढ़ रियासत के विलय के लिए उनके द्वारा अपने गई बुद्धि चातुर्य अकल्पनीय और अद्वितीय था।आधुनिक भारत के शिल्पकार सरदार पटेल का योगदान जितना देश की आजादी में है उससे कही अधिक स्वतंत्र भारत को एक करने में है। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्रता के पश्चात् भारत की एकजुटता के लिए पुरजोर तरीके से पूरी मज़बूती के साथ काम किया। जिससे एक नए राष्ट्र का उदय हुआ। देश की एकता की।रक्षा करने के समक्ष कई चुनौतियां स्पष्ट रूप से विद्यमान थीं। सरदार पटेल ने लाजवाब कौशल के साथ इन चुनौतियों का सामना करते हुए देश को एकता के सूत्र में बांधने के कार्य को पूरा किया।सरदार पटेल ने राष्ट्रीय आंदोलन को वैचारिक एवं क्रियात्मक रूप से नई दिशा देने के कारण उनका राजनीतिक इतिहास में एक गौरवपूर्ण,अविस्मरणीय स्थान है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जब देश विभिन्न समस्याओं से संघर्ष कर रहा था उस समय उन्होंने जिस अदम्य उत्साह और असीम शक्ति से देश का नवनिर्माण किया प्रारंभिक कठिनाइयों का समाधान किया, उसके कारण विश्व के राजनीतिक मानचित्र में उनकी विराट छवि निर्मित हुई।अपनी तात्कालिक निर्णय क्षमता और अडिगता के कारण उन्हें लौह पुरुष कहा जाता है।ससरदार पटेल का स्वभाव समुद्र की भांति धीर गंभीर था कोई भी घटना उनको विचलित नही कर सकता थी इसका उदाहरण तब देखने को मिला जब वो अदालत में मुकद्दमा लड़ रहे थे इसी दौरान उन्हें एक तार मिला जिसमे उनकी पत्नि के देहांत की खबर थी बाबजूद इसके उन्होंने मुकद्दमें की जिरह पूरी की।आज जरूरत है सरदार पटेल के नक्शेकदम पर चलकर राष्ट्र कल्याण हेतु सभी अपने कर्तव्यों को पूरी ईमानदारी से निभाये यही उनके लिये सच्ची श्रंद्धाजलि होगी।

(लेखक राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षक हैं)

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