छात्रों के गिरते नैतिक स्तर के लिए जिम्मेदार कौन - शिक्षा नीति,सरकारें, अभिभावक ,शिक्षक समुदाय या सोशल मीडिया

By UKM123 | फ़रवरी 20, 2018

आप सभी गुरुजनों से आपके कीमती विचार सादर आमंत्रित है

आप सभी का अनुज

उपेन्द्र कुमार मौर्य

UKM123 का छायाचित्र

उपरोक्त सन्दर्भ में मेरा अपना निजी विचार यह है कि सर्वप्रथम छात्रों में नैतिकता के ह्रास के लिये सर्वाधिक जिम्मेदार है आजकल सोशल मीडिया और मीडिया फिर अगले क्रम में आती हैं सरकारें और उसकी शिक्षा से संबंधित लुंजपुंज नीतियाँ अब उसके बाद नम्बर आता है अभिभावकों का जिनमें कुछ अभिभावक जो अनपढ है उनको छोड़कर बाकी पढ़े लिखे अभिभावकों का शत प्रतिशत दायित्व बनता है कि वे अपने बच्चों के नैतिक विकास और उसकी समस्त गतिविधियों पर नजर रखे और गलत कार्य न करने की शिक्षा अपने बच्चों को व्यावहारिक रूप से दे|यदि अभिभावक चाहते है कि बच्चे नशा न करें किसी के साथ गाली-गलौज न करें तो उन्हे सर्वप्रथम अपने घर परिवार व मुहल्ले में ऐसे वातावरण का निर्माण करना होगा जिससे बच्चे नैतिक दुविधा की स्थिति से बचे रहे।
अब बारी आती है शिक्षक समुदाय की तो मेरा मानना है कि आज तकनीकी युग मे रहकर शिक्षकों को भी एक दायरे में रहना होगा क्योंकि शिक्षा जब तक व्यावहारिक नही होगी तब तक उपदेश मात्र से आज तक न कुछ हुआ न होगा जैसे यदि हम खुद कोई नशा करे तो बच्चों को न करने की शिक्षा देना कहा तक उचित होगा और ठीक यही बात मीडिया और सोशल मीडिया के संदर्भ में भी शिक्षकों पर भी लागू होंगी।

क्रमशःआप सभी के सुझाव आमन्त्रित है।
आपका अनुज
उपेन्द्र कुमार मौर्य

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