कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट

By Madhav Patel | सितंबर 10, 2020

*कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट एक क्रांतिकारी बदलाव*

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट के आयोजन पर विचार कर रही है| सरकार का मानना है, कि विभिन्न सरकारी नौकरी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता के उद्देश्य से सभी सरकारी नौकरी की परीक्षाओं के लिए एक प्लेटफॉर्म ‘कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट’ (CET) होना चाहिए ,जिससे भर्ती परीक्षाओं का समुचित और उचित ढंग से संचालन किया जा सके, और अभ्यर्थियों की परीक्षा के दौरान होनें वाली समस्याओं से बच सकें| इस संबंध में केंद्र सरकार ने एक बड़ा संशोधन करने की योजना बनायी है। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के अनुसार, ग्रुप ‘बी’ के गैर-राजपत्रित पदों,और ग्रुप ‘सी’ के कुछ पदों तथा सहायक सरकारी संगठनों के पदों पर नियुक्ति के लिए कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट कराने के लिए एक विशिष्ट एजेंसी गठित करने का प्रस्ताव दिया है साथ ही नियुक्तियों की संभावित संख्या प्रस्तुत भी की है। अभी तक सरकार के विभिन्न विभागों में जब यह भर्तियाँ होती थी तो छात्रों को अलग – अलग विभाग में आवेदन करनें के लिए अलग-अलग शुल्क के साथ ही परीक्षा के अनुसार निर्धारित परीक्षा केंद्र पर पहुचनें के लिए यात्रा व्यय करना पड़ता है इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार नें एक देश एक परीक्षा का प्रस्ताव दिया है।इससे सभी प्रतिभागियों को सामान अवसर प्राप्त होगा।परीक्षा का आयोजन एक ही एजेंसी द्वारा कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी समान योग्यता परीक्षा आयोजित की जाएगी जो कि रेलवे, बैंकिंग और केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए ली जाने वाली प्राथमिक परीक्षा की जगह लेगी। ख़ास बात ये है कि ये परीक्षा शुरू होने के बाद परीक्षार्थियों को अलग अलग परीक्षाओं और उनके अलग-अलग ढंगों के लिए तैयारी नहीं करनी पड़ेगी।क्योंकि एसएससी, बैंकिंग और रेलवे की परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सवालों में एकरूपता नहीं होती है। ऐसे में युवाओं को हर परीक्षा के लिए अलग तैयारी करनी पड़ती है।इसका लाभ ये भी होगा कि रिजल्ट आनें में समय कम लगेगा। बार बार शुल्क नहीं देना होगा। देश के प्रत्येक जिले में दो परीक्षा केंद्र होने से छात्रों को किसी दूसरे जिलें में परीक्षा देने के लिए यात्रा व्यय और लगने वाला समय दोनों की बचत होगी।अभ्यर्थियों को स्वेच्छा से परीक्षा केन्द्र का चुनाव कर सकेंगे।चयन प्रक्रिया में कम समय लगेगा, साथ ही एक पोर्टल के माध्यम से कॉमन रजिस्ट्रेशन होगा। इससे प्रतिभागियों के समय का अपव्यय भी रुकेगा। सीईटी के अंतर्गत परीक्षाएं तीन स्तरों पर आयोजित किए जाने का सुझाव दिया गया है-मैट्रिक्यूलेशन स्तर,उच्च माध्यमिक स्तर व स्नातक स्तर परीक्षा की वैधता सरकार द्वारा तीन साल की अवधि रखा जाना प्रस्तावित है।निश्चित रूप से कमान एलिजिबिलिटी टेस्ट दूरगामी परिणाम के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

Madhav Patel का छायाचित्र

विचार आमंत्रित

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