आखिर मेहनत का परिणाम क्यों दिखाई नहीं देता ?

By Imran Khan | फ़रवरी 11, 2015

प्राथमिक विद्यालय में शिक्षण कराते काफी समय निकल गया, अब उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यालय में आ गया हूँ | पर कुछ समस्याएं जिन्हें मैं प्राथमिक स्तर की ही समझता था ... ज्यों की त्यों हैं | एक शिक्षक पूरी मेहनत करता है, पूरी ईमानदारी से अपना कर्तव्य पालन करता है | नवीन शिक्षण विधियों के प्रयोग से भी नहीं कतराता | अपने आप को अद्यतन रखने के लिए खूब अध्ययन भी करता है .....परन्तु .... सभी बच्चे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते ?

मेरी नजर में सरकारी विद्यालय के अनुभव के आधार पर इसका सबसे बड़ा कारण जों मुझे नजर आया वह है - कक्षा में बच्चों अनियमित उपस्थिति ।
जो विद्यार्थी नियमित रूप से विद्यालय में आते हैं उनका स्तर शायद ही कभी चिंता का विषय रहा हो .... पर अनियमित विद्यार्थी पूरी कक्षा के औसत स्तर को बिगाड़ देते हैं ? अनियमितता के मुख्य कारण है - आ रहे बच्चों का पारिवारिक स्तर, आर्थिक स्तर, अभिभावकों की शिक्षा के प्रति समझ। एक शिक्षक के नाते हम अभिभावकों से संपर्क कर विद्यार्थीं को नियमित विद्यालय लाने के लिए प्रयास करते हैं पर ये हर बालक को नियमित नहीं रख पाते क्योंकि ऐसी कई बार बच्चे की पारिवारिक स्थितियां इतनी जटिल होती हैं की हम चाह कर भी ज्यादा कुछ नहीं कर पाते....|

मैं आपके विचार जानना चाहता हूँ की एक शिक्षक के नाते हमें क्या और करना चाहिए ... जिससे हमारी मेहनत के अपेक्षित परिणाम दिखाई दे सकें ?

rakeshkumarnama का छायाचित्र

सामान्यतया सभी सरकारी ग्रामीण विद्यालयों की ये मुख्य समस्या है। कृषि कार्यों पशुओ को पानी पिलाने के लिए एवं अन्य घरेलू कार्यों के नाम पर विद्यार्थियों को विशेषकर लड़कियों को आये दिन छुट्टी करके घर ले जाते है अगर न दे तो लड़ने पर उतारू हो जाते है।

subhashg का छायाचित्र

बिल्कुल सही कहा आपने ये ग्रामीण विद्यालयों की बहुत बड़ी समस्या है और औसतन उन्ही बच्चों का स्तर कमजोर पाया जाता है जो अनियमित होते है । निश्चित तौर पर हम एक अध्यापक होने के नाते एेसे बच्चों के पालकों से मिलकर स्थिति में सुधार ला सकते है ।

anil parmar का छायाचित्र

बच्चे कि एवं उसके अभिभावक की मानसिक स्थिति को समझना जरूरी होता है । मेरे साथ के मेरे कइ दोस्त आधी पढाई छोडकर ही चले गये थे क्योकि उसे शिक्षा में अपना भविष्य नहीं दिखाई देता था। एसे काफी लडके थे । बच्चो एवं अभिबावक कि सुरक्षा शिक्षा को देनी चाहिए अगर देती है तो उसका विश्वास संपादन भी करना चाहिए । यही शिक्षा की कमजोरी रही है शिक्षा यह विश्वास कायम करने में असफल दिखिती है कि यदि तुम शिक्षा में अपना समय दोगे तुम सुरक्षित जिवन यापन कर पायओगे । हम जानते ही है कि आज पढे लिखो के लिए बेरोजगारी बडी समस्या है । शिक्षा को इस संदर्भ में भी अपने आप को मजबूत बनाना होगा हम देख रहे है कि प्रतिभासंपन्न ही शिक्षा का संपूर्ण फायदा उठा लेते है और बाकी के हिस्से मे तो वही मजदूरी करनी आती है यदि अधिक पढने के बाद मजदूरी ही करनी है तो फिर पढे क्यो एसे मत कई अभिभावको के भी है तो शिक्षा को अब इस संदर्भ में भी सोचना ही चाहिए ।

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