आई सी टी उपकरण और विद्यार्थी आंकलन

By Madhav Patel | फ़रवरी 14, 2020

*आई सी टी उपकरण और विद्यार्थी आंकलन*
माधव पटेल

"करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत जात ते सिल पर परत निसान"
ये वाक्य हमे सोचने पर मजबूर करता है कि एक मंदगति से सीखने वाले छात्र के लिए आखिर उस समय के शिक्षक ने कैसे जाना होगा कि वह सीख सकता है भले ही उसे समय अधिक लगे ।यदि हम गौर से देखे तो पाएंगे कि ये शिक्षक के आंकलन करने के दृष्टिकोण का प्रतिफल है कि उसने यह जान लिया कि मंदगति से सीखने वाले विद्यार्थी भी बारंबार प्रयास करके सीख सकते है।आंकलन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो शिक्षक के लिए विद्यार्थी के विकास की नई दिशा देती है शिक्षक को अवसर होता है कि वह जान सके कि विद्यार्थी की रुचि किस क्षेत्र में है हम आंकलन की प्रक्रिया को किसी दायरे में बांध नही सकते समय और संसाधनो के अनुसार आंकलन के तरीकों और अवधारणा में भी लगातार परिवर्तन आया है
जिस प्रकार शिक्षण तकनीक परम्पराओ पर नही आवश्यकताओ पर निर्भर करती है समयानुसार शिक्षण की पद्धतियों में अमूल चूक परिवर्तन हुए और वह सफल भी हुए।कई बार शिक्षण पद्धतिया वातावरण के अनुसार होतीं है उनका पूर्णतः अनुशरण नही किया जा सकता क्योंकि हर स्थान की परिस्थिति भिन्न भिन्न होती है यही बात विद्यार्थियों के आंकलन पर लागू होती है कि हम इसको पाठ्यक्रम की भांति सीमाओं में समाहित नही कर सकते कुछ समय पूर्व तक आई सी टी का उपयोग सीमित था तो इसका हम आंकलन का हिस्सा भी नही मानते थे परंतु अब आई सी टी उपकरणों के उपयोग से सफलताएं मिल रही है तो इसके प्रभाव को भी विद्यार्थी के समग्र आंकलन में सम्मिलित किया जाना नितांत आवश्यक है।
आईसीटी का उपयोग शिक्षकों द्वारा अधिगम प्रक्रिया को 'विद्यार्थी केंद्रित' ज्ञानार्जन हेतु वातावरण बनाने में मदद देने वाले उपकरणों के रूप में देखा जाता है।आईसीटी का सबसे प्रभावी उपयोग उन मामलों में होता है, जिनमें शिक्षक, आईसीटी की मदद से, पूरी-कक्षा में विचार-विमर्श या समूह कार्य के ज़रिए विद्यार्थियों की समझ और सोच का आंकलन करते है। पारम्परिक ‘शिक्षक-केन्द्रित’ शिक्षण पद्धति से ‘’विद्यार्थी-केन्द्रित’ पद्धतियों की ओर जाने में समर्थता प्रदान करने व सहयोग करने के लिए महत्वपूर्ण उपकरणों के रूप में आईसीटी को देखा जाता है।
आईसीटी को बदलाव में सहयोग प्रदान करने तथा प्रचलित शैक्षणिक प्रथाओं के सहयोग/संवर्द्धन में प्रयुक्त किया जा सकता है।आईसीटी का उपयोग प्रचलित शैक्षणिक पद्धतियों के सुदृढीकरण के साथ-साथ शिक्षकों और छात्रों के बीच संवाद के तरीके को सुदृढ करने के लिए किया जा सकता है।जानकारी की प्रस्तुति के लिए आईसीटी उपकरणों का प्रयोग मिश्रित रूप से प्रभावी होता है प्रस्तुति उपकरणों ओवरहेड और एलसीडी प्रोजेक्टर, कम्प्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक व्हाइटबोर्ड, जहां छात्र एक साथ कंप्यूटर स्क्रीन पर एक ही संसाधनों को देखते हैं के रूप में आईसीटी का उपयोग एक मिश्रित प्रभाव के रूप में देखा जाता है
शिक्षकों को आईसीटी के उपयोग से लाभ के लिए तैयार करना केवल तकनीकी कौशल नही है वल्कि इससे कही अधिक है
शिक्षण में आईसीटी के सफल उपयोगके लिए शिक्षक की आईसीटी कौशल में तकनीकी ज्ञान प्राप्त करना उसके प्रभावी उपयोग हेतु आवश्यक है
शिक्षकों को व्यावसायिक विकास करने में आई सी टी के प्रयोग बहुत ही महत्वपूर्ण है
शिक्षक के आईसीटी से संबंधित कौशल के विकास को जारी रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक है उनके द्वारा नियमित रूप से इनका उपयोग कर पाना तथा प्रासंगिक आईसीटी उपकरण के लिए सुगमता लाना।शिक्षक का विषय ज्ञान आईसीटी के उपयोग को प्रभावित करता है।जिस तरह शिक्षकों द्वारा पाठ में आईसीटी का उपयोग किया जाता है, वह इस बात पर निर्भर करता है कि अपने विषयों पर शिक्षकों की कितनी पकड़ है और वे किस तरह आईसीटी संसाधनों को प्रासंगिक बनाकर उनका उपयोग कर सकते हैं।शिक्षक की विषयवस्तु पर महारथ और छात्र की ग्रहण क्षमता की समझ आईसीटी केउपयोग को अधिक प्रभावी बनाती है।प्रमाण यह बताता है कि जब शिक्षक - विषय ज्ञान और जिस तरह से विद्यार्थी विषय को समझते हैं – इन दोनों बातों के अपने ज्ञान का उपयोग करते हैं, तब के छात्र की उपलब्धि पर आईसीटी के प्रयोग का अधिक प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है।
प्राप्ति पर प्रभाव सबसे अधिक तब होता है जब विद्यार्थियों को सोचने के लिए चुनौती दी जाए और उनकी अपनी समझ पर सवाल किए जाएं, बजाय नई और अतिरिक्त जानकारी के सम्पर्क में लाने के।
आईसीटी विषय के मामले में स्व-शिक्षा के लिए शिक्षक की सहायता कर सकते हैं
अद्यतन और सीखने के अतिरिक्त संसाधनों का उपयोग प्रदान कर, आईसीटी शिक्षक को उसके विषय क्षेत्र में स्व-शिक्षा के लिए सक्षम कर सकते हैं।
शिक्षक का व्यावसायिक विकास
शिक्षक का सतत प्रशिक्षण और सहायता शिक्षा के क्षेत्र में आईसीटी के सफल उपयोग के लिए महत्वपूर्ण है
शिक्षक का प्रशिक्षण और व्यावसायिक विकास शिक्षा के क्षेत्र में आईसीटी के सफल प्रयोग के लिए मुख्य चालक के रूप में देखा जाता है।
आईसीटी का परिचय शिक्षकों के व्यावसायिक विकास की आवश्यकताओं में वृद्धि करता है
आईसीटी के उपयोग पर हैंड्स-ऑन अनुदेश आवश्यक है जहां आईसीटी को शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण घटक है। इसके अलावा, व्यावसायिक विकास गतिविधियां प्रभावी तरीकों और व्यवहार के मॉडल के अनुरूप होनी चाहिये और उन्होंने शिक्षकों के बीच सहयोग का प्रोत्साहन तथा समर्थन करना चाहिए। स्कूल स्तर पर आईसीटी सुविधाओं के उपयोग से सतत व्यावसायिक विकास को सफलता के लिए एक प्रमुख कारक के रूप में देखा जाता है, खासकर तब जबकि ये शिक्षकों की दैनिक आवश्यकताओं और प्रथाओं के लिए सीधे प्रासंगिक संसाधनों और कौशलों पर केन्द्रित हों।शिक्षक की व्यावसायिक विकास गतिविधियों के निर्माण और भागीदारी में मूल्यांकन से पहले आवश्यकता का मूल्यांकन होना चाहिए, इन गतिविधियों की नियमित निगरानी और आकलन होना चाहिये, और फीडबैक लूप स्थापित किये जाने चाहिए अगर व्यावसायिक विकास प्रभावी करना हो, जो शिक्षकों की जरूरतों के लिए लक्षित हो।
शिक्षण के तरीकों में परिवर्तन, पाठ्यक्रम और मूल्यांकन में फेरबदल,से अनुकूलन में मदद मिलती है। सक्षमता प्रदान करने वाले पर्याप्त कारक होने के साथ, शिक्षक आईसीटी का उतना रचनावादी उपयोग कर सकते हैं, जितना उनका शैक्षणिक दर्शन अनुमति देता हो।
कार्यशील तकनीकी अवसंरचना महत्वपूर्ण है
नए कौशल विकसित करने, अपनी मौजूदा शिक्षण पद्धतियों और पाठ्यक्रम में अपनी एकरूपता का पता लगाने और आवश्यक अतिरिक्त पाठ की योजना बनाने के लिये शिक्षकों को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिये, यदि आईसीटी का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करना हो।
स्कूल प्रशासन और समुदाय की सहायता महत्वपूर्ण हो सकती है
अभ्यास तथा साथियों के नेटवर्क के औपचारिक और अनौपचारिक समुदाय के अस्तित्व शिक्षा की पहल और गतिविधियों में आईसीटी की सहायता के लिये महत्वपूर्ण उपकरण हो सकते हैं। इस तरह की सहायता तंत्रों की मदद आईसीटी के उपयोग के माध्यम से की जा सकती है।
शिक्षा के क्षेत्र में आईसीटी शुरू करने से सीखे गये सबक साझा करने की आवश्यकता है चूंकि शिक्षा की सहायता के रूप में आईसीटी की शुरूआत अक्सर एक बड़े परिवर्तन या सुधार प्रक्रिया का हिस्सा होती है, यह महत्वपूर्ण है कि आईसीटी के सफल प्रयोग की जानकारी को बढ़ावा दिया जाये तथा इसका फैलाव किया जाये।
आई सी टी को उपयोग में लाने से जहा शिक्षण रोचक और सर गर्भित हुआ है वही पाठ्यक्रम में वांछित सीखने के प्रतिफल में प्राप्त होने में बहुत सहायता मिल रही है जीवविज्ञान, गणित आदि में ऐसी कई अवधारणाये आती है जिनको 3d आकृतियों में समझाया जा सकता है, मानव शरीर की आंतरिक क्रियाविधि आदि को कई मोबाइल एप्प की सहायता से ज्यादा प्रभावी तरीके से सिखाया जा सकता है।आई सी टी को बढ़ावा देने के लिए कई सरकारे भी सक्रिय है आज के परिपेक्ष्य में आई सी टी शिक्षण प्रक्रिया का अनिवार्य अंग हो गई है अनेक स्थानों पर sd card वितरित किये गए है जिनमे समाहित वीडियो के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को रोचक बनाया जा रहा है।आई सी टी के विभिन्न उपकरण विद्यार्थियों के आंकलन में शिक्षकों की बहुत ही महत्वपूर्ण मदद करते है इनकी मदद से शिक्षक ये जान पाने में सक्षम हो पाते है कि विद्यार्थी को अभी कहा और अधिक सहयोग करने की आवश्यकता है या कौन सा विद्यार्थी किस विधा में आगे जा रहा है इस आंकलन में विद्यार्थी को कुछ पता ही नही चल पाता और शिक्षक अपनी पठन पाठन की क्रिया में वांछित सुधार और सहयोग भी कर लेता है।
माधव पटेल

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