किसी 'खास' की जानकारी भेजें। नेतीराम मीणा : एकला चलो रे...

राजकीय शिक्षाकर्मी प्राथमिक विद्यालय कूकडीखेड़ा, पंचायत समिति शिवगंज, जिला सिरोही (राजस्थान) विद्यालय में दो कमरे हैं। बालक-बालिकाओं के लिए अलग अलग मूत्रालय बने हुए हैं। पंचायत द्वारा आवंटित की हुई 3 बीघा जमीन पर खेल मैदान है। विद्यालय परिसर में बरगद व नीम का पेड़ तथा फूलों का अच्छा बगीचा है जो विद्यालय को सौन्दर्य प्रदान करता है। विद्यालय तक का आम रास्ता जंगल से जुड़ा हुआ है। गांव के लोग अपने-अपने कुओं पर आवास करते हैं।

इस विद्यालय में मैं एक ही अकेला अध्यापक हूँ। विद्यालय में कुल नामांकित 23 छात्र-छात्राएँ हैं।

समस्या

विद्यालय में कक्षा 1 से 5 तक कक्षाएँ संचालित हैं, एक अध्यापक इन विद्यार्थियों का कोर्स पूर्ण नही करवा सकता। क्योंकि अध्यापक के पास शिक्षण के अलावा भी काफी कार्य होते हैं जैसे कार्यालय सम्बन्धी, पोषाहार, एसएसए, ई-ग्राम, पल्स पोलियो आदि। इन कार्यो में व्यस्त होने से विद्यालय का संचालन तो सही तौर पर हो जाता है लेकिन इस कारण इन कक्षाओं में कोर्स अपूर्ण रहने की संभावनाएँ रहती हैं। दूसरी समस्या कुछ विद्यार्थी समय पर विद्यालय नहीं आते और अपने घर के कार्यो में व्यस्त रहते हैं। इन विद्यार्थियों के माता-पिता इनसे घरेलू कार्य करवाते हैं।

समाधान के प्रयास

मैंने विद्यालय में अन्य शिक्षक की नियुक्ति के लिए प्रयास कर बीईओ कार्यालय से सम्पर्क किया एवं प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। परन्तु समाधान नहीं हुआ। तब मैंने  स्वयं समाधान निकालने का तरीका अपनाया। विद्यार्थियों को समय पर लगातार विद्यालय में बुलाया और शिक्षण कार्य को बाधित नही होने दिया, चाहे कार्यालय सम्बन्धी कितना भी कार्य हो।

जो विद्यार्थी विद्यालय नहीं आते, तो दूसरे दिन स्वयं उनके घर जाकर, अभिभावकों से सम्पर्क कर विद्यार्थियों को विद्यालय से जोड़ने का लगातार प्रयास करता हूँ। ताकि विद्यार्थी विद्यालय में लगातार आकर शिक्षण कार्य कर सकें।

विद्यालय में विद्यार्थियों से अपने मित्र जैसा व्यवहार कर गुरुमित्र जैसा सम्बन्ध स्थापित किया। रोचक कविता, गीतों द्वारा विद्यार्थियों में अध्ययन का भय कम करने का प्रयास किया।

प्रार्थना सभा को रोचक बनाया। उसमें विभिन्न प्रार्थनाओं के अलावा विद्यार्थियों में प्रश्न उत्तर हल करवाना, गणवेश, नाखूनों की साफ-सफाई आदि बातों में विद्यार्थियों में हलचल पैदा करना ताकि हमेशा साफ सुन्दर होकर विद्यालय पहुँचें।

खेल खेल में कविता लय-ताल उतार-चढ़ाव से बोलकर विद्यार्थियों से बुलवाने तथा खेल के द्वारा गणितिय अंकों की पहचान करवाना।

शैक्षणिक प्रयास

अपने सीमित संसाधनों की मदद से कक्षा 1 से 2 तक के विद्यार्थियों में गणितीय तथा अन्य कुशलताओं के विकास के लिए कुछ प्रयोग किए।

  • कक्षा 1 व 2 को साथ बिठाकर हिन्दी, गणित तथा अंग्रेजी का अध्ययन करवाया। इसी तरह कक्षा 3,4 व 5 को दूसरे कमरे में बिठाकर उनको हिन्दी,गणित पढ़ाया।
  • कंकड़ की मदद से उनमें गिनने तथा साधारण जोड़, बाकी का अभ्यास करवाया।
  • श्यामपट्ट पर उनसे आड़ी-तिरछी आकृतियाँ बनवाईं। ताकि अंक बनाना सीखना में उन्हें मदद मिले।
  • कविता के माध्यम से अपने शरीर के अंगों की गिनती करवाकर अभ्यास करवाया।
  • तीलियों के बंडल के माध्यम से इकाई, दहाई तथा सैकड़े की अवधारणा विद्यार्थियों को समझाने का प्रयास किया।

इन सब प्रयासों से विद्यालय के विद्यार्थियों की शैक्षणिक स्थिति अच्छी है।

नेतीराम मीणा

  • बी.ए., शिक्षाकर्मी अध्यापक
  • वर्ष 2001 से अध्‍यापन
  • रुचियाँ: खेल, गीतों व कविता के द्वारा शिक्षण कार्य करवाना।

    वर्ष 2009 में राजस्‍थान में अपने शैक्षिक काम के प्रति गम्भीर शिक्षकों को प्रोत्‍साहित करने के लिए ‘बेहतर शैक्षणिक प्रयासों की पहचान’ शीर्षक से राजस्‍थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद तथा अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन द्वारा संयुक्‍त रूप से एक कार्यक्रम की शुरुआत की गई। 2010 तथा 2011 में इसके तहत सिरोही तथा टोंक जिलों के लगभग 50 शिक्षकों की पहचान की गई। इसके लिए एक सुगठित प्रक्रिया अपनाई गई थी। नेतीराम मीणा वर्ष 2010-11 में कक्षा में बेहतर शैक्षणिक अभ्‍यासों के लिए चुने गए हैं। यह टिप्‍पणी पहचान प्रक्रिया में उनके द्वारा दिए गए विवरण का सम्‍पादित रूप है। लेख में आए विवरण उसी अवधि के हैं। टीचर्स ऑफ इण्डिया पोर्टल टीम ने नेतीराम जी से उनके काम तथा शिक्षा से सम्‍बन्धित मुद्दों पर बातचीत की। वीडियो इसी बातचीत का सम्‍पादित अंश हैं। हम नेतीराम मीणा ,राजस्‍थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद तथा अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन, सिरोही के आभारी हैं।


     

टिप्पणियाँ

JAYANT BABU का छायाचित्र

आपका प्रयास काबिलेतारीफ है.

nrawal का छायाचित्र

नेतीराम मीणा बधाई के पात्र हैं. आशा है जैसे अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन ने उन्हें सराहा है वैसे ही राजस्थान सरकार भी उन्हें पहचान दे और उन्हें पूरी सहायता दे जिससे विद्यालय आगे बढ़ सके और ज्यादा बच्चों को उनका लाभ मिल सके

धन्यवाद् .

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