बच्‍चों के नाम शिक्षिका का पत्र

मेरे प्यारे बच्चो,

आज शिक्षक दिवस है। मुझे पता है , तुम्हें इस दिन का इंतजार रहता है। लाख मना करने पर भी तुम अपने लिए मिले बहुत थोड़े से रुपयों में से कुछ रुपए बचाकर मेरे लिए एक पेन जरूर लेकर आते हो। जो बच्चे पेन नहीं ला पाते उन्हें लगता है उनसे न जाने क्या गलती हो गयी है। काश कि पेन देने के बजाए तुम सब दौड़ कर आओ और कस के मेरे गले लग जाओ। तुममें से हर कोई ऐसा नहीं कर पाता है जरूर मेरे व्यवहार में ही कोई कमी है। वरना हर बार मैं ही तुम्हें गले क्यों लगाती हूँ । मैं ही तुमसे क्यों प्यार जताती हूँ। जैसे जैसे तुम बड़े होते हो मेरी पहुँच से दूर क्यों होते जाते हो । शायद अभी मुझे बहुत कुछ सीखना बाकी है।

हालांकि तुम्हारे दिए पेन ,फूल और ग्रीटिंग कार्डस मेरे लिए अनमोल तोहफे हैं। फिर भी सबसे बड़ा तोहफा वह होता है जब तुम बेझिझक अपने मन की बात मुझसे कह पाते हो। जब तुम कक्षा में मेरे पढ़ाए विषय पर प्रश्न पूछते हो। किसी सवाल के समझ न आने पर डर कर चुप नहीं बैठ जाते बल्कि दौड़ कर पास आकर अपनी बात मुझसे साझा करते हो। जब मेरे गुस्सा होने पर थोड़ी देर चुप रहते हो और फिर अगले ही पल मुस्कुरा कर पास आते हो। ऐसा लगता है तुम यह कह रहे हो ,चलो बहुत हो गया गुस्सा अब काम शुरू करते हैं।

तुम्हारा बालमन पता नहीं मेरे बारे में क्या सोचता-समझता है। पर एक बात का तो मुझे यकीन है कि हमें एक दूसरे के साथ अच्छा लगता है। तुम्हारे बढ़ने-सीखने में मैं खुद का बढ़ना-सीखना देख पाती हूँ और जहाँ-जहाँ तुम गलतियाँ करते हो, मुझे अपनी गलतियाँ समझ आती हैं।

मैं जानती हूँ तुममें नयी चीजों को सीखने की अपार संभावनाएँ हैं। किताबें तुम्हें आकर्षित करती हैं। तुम इस दुनिया के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहते हो। तुम वह सब सीखना चाहते हो जिन्हें सीखने का तुम्हें अधिकार है। तुम्हें इस बात पर भरोसा है कि स्कूल तुम्हें सीखने के नए-नए मौके देगा। मैं तुम्हारे इस भरोसे का सम्मान करती हूँ। तुम्हारी क्षमताएँ अनंत हैं और मेरे पास तुम्हें बताने-सिखाने के लिए बहुत थोड़ी सी दक्षताएँऔर समझ है। जब तुम बड़े होंगे तब इस बात पर हँसोगे कि तुमने स्कूल से कितना कम सीखा। तुम्हारी मैडम को कितना कम आता था।

मेरे बच्चों अब मैं तुम्हें कैसे बताऊँ कि मैं हर रोज इस आत्मग्लानि से भर जाती हूँ कि तुम्हें कितना कम बता पाती हूँ जबकि इस दुनिया में जानने समझने के लिए कितनी सारी रोचक और जरूरी बातें हैं। समय के साथ तुम जान जाओगे कि जीवन ही सबसे बड़ा स्कूल है और किताबों का पढ़ना तब तक सार्थक नहीं होता जब तक कि हम इस बात को न समझें कि दुनिया में प्रेम और विश्वास से बड़ी कोई चीज नहीं। ये दुनिया हम सबकी है और अपने अलावा दूसरे का सम्मान और निजता भी उतनी ही जरूरी चीजें हैं। इस दुनिया को खूबसूरत और सबके रहने लायक बनाना हमारी साझी ज़िम्मेदारी है। और भी बहुत कुछ जो जितना जरूरी किताबों में लगता है उससे कई गुना जीवन में जरूरी है।

मैं बहुत बार असफलताओं से निराश हो जाती हूँ। तुम्हें सीखने के बेहतर अवसर और संसाधन न दे पाने के कारण शर्मिंदा होती हूँ पर तुम्हारे हौसलों के आगे मेरी सारी निराशाएँ हार मान लेती हैं। तुम्हारी मुस्कानें मेरी सारी थकान दूर कर देती हैं। मैंने तुमसे जो सीखा है वह बताना मुश्किल है। तुम्हारे साथ रहकर लोगों और दुनिया पर मेरा भरोसा और मजबूत हुआ है। मुझे विश्वास है तुम मेरी कमजोरियों को नजरअंदाज करोगे । मेरी गलतियों को माफ करोगे। मुझे खुशी होगी जब तुम मेरी कमियों के बारे में खुल कर मुझे बताओगे जैसा कि मैं तुम्हें बताती हूँ। और हम यूँ ही एक दूसरे से सीखते- सिखाते रहेंगे।

खूब प्यार तुम्हें

तुम्हारी छात्रा और शिक्षिका

रेखा चमोली

(रेखा चमोली के फेसबुक वॉल से साभार)

 

टिप्पणियाँ

parveenwrites का छायाचित्र

बोल-बोल कर पढ़ा!
और आपके शब्दों में ख़ुद को ही जिया। यही तो हम सब का जीवन है!

17290 registered users
6659 resources