पढ़ना और अन्‍धविश्‍वास से लड़ना

जब आप विज्ञान यह सोच कर पढ़ाते हैं कि इसके द्वारा बच्चों में कुछ स्किल्स या क्षमताओं का विकास करना है तो निश्चित ही उसके कुछ परिणाम भी समय-समय पर मिलते रहते हैं। जैसे विज्ञान में प्रश्न पूछने और प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए खोजबीन करना एक विशेष स्किल है।

सिमरन ने कक्षा 5 में हमारे स्कूल में प्रवेश लिया था। शुरुआत में वह कम ही बोलती थी। जिस परिवेश से वह आई थी उसमें बहुत सी सामाजिक मान्यताएँ भी वह अपने साथ लेकर आई थी। उसके साथ तीन और बच्चों ने भी प्रवेश लिया था वे भी कुछ-कुछ सिमरन की तरह ही सोच रखते थे। कक्षा के अन्य बेटे चूँकि शुरू से ही स्कूल में पढ़ रहे थे इसलिए उनके साथ समाज में व्याप्त अन्धविश्वास आदि पर बहुत चर्चा होती रहती थी। इसलिए वे अक्सर सिमरन के साथ बहस में पड़ जाते थे। अंधविश्वासों की इस तरह की बहस समय-समय पर मुझ तक भी आती रहती थी। जैसे :  

  • आदमी या औरत के शरीर में देवता या देवी आती है।
  • चौराहों पर टोटके से बुरा होता है।
  • क्या सच में भूत होते हैं ?

तार्किक रूप से इस तरह के सवालों का जवाब खुद तर्क से देते हैं लेकिन समस्या वहाँ खड़ी हो जाती थी जब कक्षा में कोई बच्चा खुद कह देता कि मैंने स्वयं भूत को देखा है या मेरे पापा या दादा ने भूत के साथ लड़ाई की है।

सिमरन के साथ हो रही इसी तरह की एक चर्चा में वह कुछ चीजों को तो अन्‍धविश्‍वास मान रही थी लेकिन कुछ बातों को लेकर उसे संशय था ।

मैंने उसे एक प्रोजेक्ट करने के लिए दिया। मैंने उससे कहा कि वह उन सभी बातों और कार्यों की सूची बनाए जिन्हें या तो वह अन्‍धविश्‍वास मानती है या फिर उसे कुछ संशय के साथ विश्वास है। साथ ही उससे यह भी कहा कि वह कुछ तथ्य, सबूत या उदाहरण भी जुटाए जो इन अन्धविश्वासों से प्रभावित हुए हों या नहीं हुए हों । जो आँकड़े उसे मिलें उनका वह विश्लेषण कर कक्षा में प्रस्तुत करे।

इस कार्य के लिए वह सहर्ष ही तैयार हो गई। इस कार्य के लिए उसने इस प्रोजेक्ट में शिल्पा को भी शामिल कर लिया। दोनों ने मिलकर करीब 2 दर्जन से अधिक लोगों जिनमें माता-पिता, पड़ोस, बुजुर्ग आदि सभी से उन्होंने प्रचलित मान्यताओं की सूची बनाने के लिए परिचर्चा की।

करीब एक हफ्ते के बाद सिमरन और शिल्पा के पास एक लम्बी सूची बन गई। लेकिन इस सूची निर्माण की प्रक्रिया में उनके व्यवहार में जबर्दस्त बदलाव भी देखने को मिला। सिमरन लगभग अधिकांश बातों की विश्वसनीयता को नकार रही थी। उन सभी बातों को भी जिनको वह पहले खुद मान रही थी। उसके विचारों के परिवर्तन में उसने बताया कि जब उसने लोगों से बात की तो उन घटनाओं को सच साबित करने के लिए उसे कोई भी सबूत नहीं दे पाए। कुछ तो उसने खुद भी आज़माकर देखे लेकिन कुछ भी नहीं हुआ।

उन्होंने अपने द्वारा तैयार इस सूची को कक्षा में भी साझा किया तथा एक लंबी चर्चा की। सभी बच्चों ने अपने-अपने अनुभव साझा किए। साथ ही बच्चों ने इस विषय पर भी चर्चा की कि समाज में ये मान्यताएँ किस प्रकार समय के अनुरूप आती है और कालान्तर में ये रूढ़िवादी मान्यताओं में बदल जाती हैं।

इसे लेकर एक कहानी भी कक्षा में सुनाई गई जो इस प्रकार है .....

एक बार एक बुजुर्ग पंडित जी थे। वे अक्सर लोगों के पूजा-पाठ,शादी आदि करवाने के लिए जाते रहते थे। उम्र को देखते हुए उन्हें लगा कि अब पता नहीं कब अन्त समय आ जाए तो क्यों न अपनी विधा मैं अपने इकलौते बेटे को भी सिखा दूँ ताकि वह भी अपना जीवन यापन सही से कर सके। एक दिन शादी के फेरे करवाने के लिए वे अपने बेटे को पहली बार साथ ले जाते हैं। जब वे अपने बेटे के साथ अच्छे से मंत्रोच्चार के साथ पूजा करवा रहे थे तो मंडप में बीच-बीच में एक कुत्ता बार-बार आकर परेशान कर रहा था। कुत्ते के बार-बार व्यवधान से पंडित जी परेशान हो गए और उन्होंने उस कुत्ते को मंडप पर बांधने के लिए कहा। घरवालों ने उस कुत्ते को मंडप के बांधकर कुछ खाने के लिए दे दिया। यह सब पंडित जी का बच्चा भी देख रहा था। किस्मत से दूसरे ही दिन पंडित जी इस दुनिया से चल बसे।

तो अगली बार पंडित जी का बच्चा अकेले शादी के फेरे करवाने के लिए गया। तो उसने फेरे पूरे करवाने से पहले कहा कि एक कुत्ता लाओ और मंडप के बांधो तभी शादी पूरी होगी। तब घरवालों ने कुत्ते का प्रबंध किया और मंडप में बांध दिया। क्योंकि पंडित जी के बेटे को लगा कि उसके पिता ने किया है वह उसे भी करना है। उसने अपने तर्क का उपयोग नहीं किया। धीरे-धीरे यह पूरे इलाके में चलन बन गया कि जब भी किसी के यहाँ शादी होती तो उसे पहले मंडप पर कुत्ता बांधना पड़ता। बाद में कुत्ते की पूजा भी शुरू हो गई और कुत्ता भगवान बन गया।

जो बाद में एक बड़ा अन्‍धविश्‍वास बन गया और समाज में कई कुरूतियों को ले आया।

इस प्रकार के कई अन्य उदाहरण बच्चों ने कक्षा में साझा किए। सिमरन और शिल्पा ने मिलकर समाज में व्याप्त अन्धविश्वासों के अपने प्रोजेक्ट को बाद में असेंबली और विज्ञान दिवस पर सभी के समक्ष प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने सभी को इसके प्रति जागरूक रहने और अन्धविश्वासों के चक्कर में नहीं पड़ने के लिए सन्देश भी दिया। उन्होंने कहा कि कई चीजें तो उन्होंने खुद करके देखी लेकिन किसी में भी उन्हें कुछ भी सच्चाई नजर नहीं आई।

सिमरन और शिल्पा द्वारा बनाई अन्धविश्वासों की लिस्ट निम्न प्रकार है -

  • कछुए वाली अँगूठी को उल्टा पहनने से पैसे आते हैं।
  • बाईं आँख फड़कने से घर में अपशकुन माना जाता है।
  • घर में काँच टूटने को अपशकुन माना जाता है।
  • उल्टे पैर करके बैठने से झगड़ा होता है।
  • उल्टे चप्पल रखने से झगड़ा होता है।
  • दायें हाथ में खुजली होने से पैसे आते हैं।
  • पैर हिलाने से मम्मी का पेट दर्द करता है।
  • रात को झाड़ू लगाना अपशकुन माना जाता है।
  • रात को उँगली चटकाने से कर्ज़ बढ़ता है।
  • ज्यादा चींटी के होने पर चप्पल उल्टी रखते हैं तो सारी चींटियाँ मर जाती हैं ।
  • गैस पर खाली बर्तन रखने से शादी टूट जाती है।
  • घर में बच्चा होता है तो सूतक माना जाती है। यही मान्यता जब घर में कोई मर जाता है तब भी होती है। उस समय उनके घर पर कोई बाहर का व्यक्ति खाना-पानी नहीं लेता है।
  • बिल्ली के रास्ता काटने से बुरा होता है।
  • रात को कुत्ता रोता है तो किसी के मरने की संभावना होती है।
  • रात को चिबड़ी चिड़ियाँ के बोलने से कोई मरता है।
  • श्मशान में या उसके पास से सज-धजकर और बाल खुले रखकर नहीं जाना चाहिए नहीं तो चुड़ेल लगती है।
  • इमली या पीपल के पेड़ के नीचे नहीं सोना चाहिए क्योंकि वहाँ भूत दिखाई देते हैं।
  • घर से बाहर कोई मीठी चीज लेकर जाते हैं तो उसे झूठा करके या उसमें कोयला, मिर्च या कील डालकर लेकर जाते हैं ताकि नजर न लगे।
  • चौराहा पार करते समय कटार या कोई लोहे की चीज पास में रखनी चाहिए।
  • दूल्हे को घर से बाहर नहीं निकालना चाहिए या उसके पास चाकू या कटार रखते हैं।
  • महीने के दिनों में मम्मी या दीदी को रसोई में काम नहीं करना तथा मंडी व पूजा आदि से दूर रहना चाहिए।
  • छींक आने पर रुकना चाहिए।
  • उल्टा तवा रखने से बारिश रुक जाती है।
  • छिपकली को लक्ष्मी का अवतार मानते हैं।
  • कढ़ाई या भगोनी में खाना खाने से शादी में बारिश आती है।
  • सिर हिलाकर लोगों में देवी या देवता प्रकट होते हैं।
  • असमय मौत से मरने वाला देवता या भूत हो जाता है।
  • बंद घड़ी घर में रखने से अपशकुन होता है ।
  • बिल्लियों के झगड़ने से घर में लड़ाई होती है।
  • सिर्फ लड़के ही वंश चला सकते हैं।
  • नाग पंचमी पर साँप दूध पीते हैं।

इनमें से कुछ अंधविश्वासों को समझते हुए सिमरन ने बताया कि पुराने समय में रात को लाइट नहीं होती थी और घर कच्चे होते थे। इस कारण रात को झाड़ू लगाने पर साँप, बिच्छू और जहरीले जानवरों का डर रहता था। इसलिए लोग रात को झाड़ू लगाने से मना करते थे। लेकिन अब समय बदल गया है इसलिए वे सभी बातें आज के समय पर लागू नहीं होती हैं। इसलिए अब हमें इन अन्धविश्वासों को नहीं मानना चाहिए।

सिमरन और शिल्पा की इन प्रस्तुतियों को सभी ने सराहा। और आगे भी इस प्रकार की वैज्ञानिक दृष्टि हेतु प्रोत्साहित भी किया। कुछ साथी शिक्षकों ने इन अन्धविश्वासों और सामाजिक मान्यताओं के पीछे के सकारात्मक पहलुओं और इनके अन्‍धविश्‍वास बनने के कारणों की तह तक जाने हेतु भी प्रोत्साहित किया।

सही भी है प्राथमिक या उच्च प्राथमिक कक्षाओं में होने वाली इस प्रकार की चर्चा और कार्य बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टि को पोषित करते हैं। विज्ञान पढ़ने का यह एक महत्वपूर्ण उद्देश्य भी है ही जिसका जिक्र हमारे संविधान में भी मिलता है। एक शिक्षक के रूप में हमारा यह दायित्व भी है कि हम बच्चों को उस दिशा में लेकर जाए जहाँ बच्‍चे अपने तर्क और विश्लेषण शक्ति के उपयोग से खुद ही सामाजिक बुराइयों को त्याग दें।


अनुराग मुद्गल, शिक्षक अज़ीम प्रेमजी स्‍कूल, सिरोही, राजस्‍थान

 

 

 

 

 

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