दायाँ और बायाँ

आनन्‍द निकेतन स्कूल एक ऐसा स्कूल है जहाँ सभी को सोचने-विचारने और तर्क करने की आजादी है। यह आजादी क्लासरूम से लेकर प्लानिंग बोर्ड तक और किचन से लेकर झूले तक दिखाई और सुनाई पड़ती है। ऐसी ही एक गणितीय आजादी का जिक्र में अपने इस लेख में करने वाला हूँ। इस लेख का नाम दायाँ और बायाँ क्यों है वो आप इस लेख को पढ़ते हुए समझ पाएँगे।
कक्षा 4 की गणित की कक्षा में सभी बच्चे तीन अंकों के गुणा के सवाल को हल करने में लगे हैं। सभी बच्चे अपने सवालों को जैसा उन्होंने हल किया वैसा ही ब्लैक बोर्ड पर समझाते हैं।

यहाँ पर बच्चों के द्वारा किए गए हल को देखिए और आपको कौन-सी विधि सही लगती है सोचिए। इस पर अपने साथी शिक्षकों से बातचीत कीजिए।

अभी तक तो सारी क्लास सही चल रही थी। पर हमारे नन्हें मेहमान जावेद (जो गुजरात से आया था और वहाँ के स्टेट बोर्ड स्कूल में कक्षा 5 का छात्र था) ने जब उसने अपने तरीके से बोर्ड पर सवाल हल करके दिखाया, तो कक्षा का माहौल ही बदल गया।
इस तरह से मुझे भी बातचीत के लिए एक नया मुद्दा मिल गया। एक नया आयाम भी मिला। मैंने खुद से इस तरह से चिंतन किया था, पर बच्चों के साथ इस तरह की बातचीत कभी नहीं हुई थी।

इस विधि में हमारे नन्हें मेहमान ने जब बाएँ तरफ से गुणा करना चालू किया तो बाकी के सारे बच्चों ने गलत-गलत चिल्‍लाना शुरू कर दिया। जावेद ने कहा कि आप सब लोग देखिए, मेरा उत्तर वही है जो आप लोगों का है। तब भी सभी बच्चों ने कहा कि आपका उत्तर तो सही है पर तरीका गलत है। जावेद ने कहा कि हमको हमारे स्कूल में ऐसे ही सिखाया है तो ये गलत कैसे हुआ।


मैंने बच्चों से पूछा कि आपको क्यों लगता है कि जावेद का उत्तर गलती से आया है। अगर ऐसा है तो क्यों न हम उसको दूसरा सवाल देकर देखें। और आप लोग भी उस सवाल को करें।
और इस बार सवाल में 123X12 लें।

सभी बच्चों ने सहमति दी और हम अगले सवाल की तरफ बढ़ गए।

जो कॉमन उत्तर था औऱ जो जावेद का उत्तर था वो यहाँ पर दे रहा हूँ। इन दोनों ही तरीकों पर फिर बातचीत शुरू हुई। बाकी बच्चों का तरीका जहाँ जावेद को समझ नहीं आ रहा था। वहीं जावेद का तरीका बाकी बच्चों को समझ नहीं  आ रहा था।
यह बात तो समझ आ रही थी कि जावेद का तरीका भी कारगर था क्योंकि उस तरीके से भी उत्तर आ रहे थे। हमने और सवाल भी करके देखे।

इस दाएँ और बाएँ की उलझन में हम इन दोनों तरीकों को खोलने के रास्ते में आगे बढ़े गए।
हम लोगों ने गुणा क्या है इस पर बातचीत करना आरम्‍भ की। प्रथमेश ने कहा जब किसी संख्‍या को बार-बार जमा करते हैं तो गुणा करते हैं। जैसे 2 रुपए 3 बार गुल्लक में डालें तो 2 गुना 3 हुआ। ऐसे ही अंश ने कहा कि जैसे एक चीज की कीमत दी हो और ज्यादा चीज़ों की कीमत देना हो तो भी गुणा करते हैं। जावेद ने भी सभी के साथ सहमति जताई।
तब मैंने कहा कि क्या कोई मुझे शुचि के तरीके को समझा सकता है कि उसने क्या किया है।
सभी बच्चों ने एक ही स्वर में कहा कि उसने हर संख्‍या को 2 बार जमा किया है।

तब मैंने एक और प्रश्न किया कि अगर शुचि 100 से स्टार्ट ना करके 3 से स्टार्ट करती तो क्या होता। तब एक बच्चे ने कहा क्यों ना हम करके देखें। तब कुछ बच्चों ने प्रयास किया। जो कुछ इस तरह से था।

कुछ बच्चों ने ऊपर दिए गए तरीके से भी किया। इसी तरह हम कई सारे सवालों से गुजरे जिनको हमने इस तरह कर कर देखा।  इन सवालों को करते समय हम लगातार बातचीत कर रहे थे। कि इसमें हो क्या रहा है। जैसे 123X2 के सवाल में 100 जो कि सैकड़ा के स्थान पर है, उसे दो गुना करने पर 200 हो जाता है। इसी तरह 20 जो कि दहाई के स्थान पर है उसे दो गुना करने पर वो 40 हो जाता है। इसी तरह 3 जो कि इकाई के स्थान पर है उसे दो गुना करने पर वह 6 हो जाता है।

बातचीत करते हुए हमने समझा कि इस बात से उत्तर में कोई अन्तर नहीं आ रहा था कि हम गुणा दाएँ तरफ से शुरू करें या बाएँ या फिर बीच में कहीं से। हमको दी गई संख्‍या को एक निश्चित मात्रा में गुणा करना है। फिर किसी भी क्रम में जोड़ने पर उत्तर वही मिलता है।

इसी क्रम में बच्चों ने काफी सारे गुणा के सवालों को अलग-अलग आर्डर में करके देखा। कुछ ने और नए तरीकों सामने रखा। जैसे 22X7 के सवाल में एक बच्चे ने 22X10 कर कर उसमें से 22X3 घटा दिया।

इन्ही सवालों के क्रम में आगे बढ़ते हुए अंश ने सवाल किया कि बाकी चीजों जैसे जोड़, घटाना में भी आगे या पीछे से शुरू करने पर क्या वही उत्तर आएगा। तो मैंने कहा क्यों न इन्हें भी कर कर देखा जाए। मैंने व्यक्तिगत तौर पर भी गणितीय क्रियाओं इस तरह से हल करके देखा। आप भी इन्हें करके देखिए और अपना अनुभव साझा कीजिए।

इस अनुभव को साझा करने का उद्देश्‍य यह है कि एक शिक्षक के तौर पर हम गणित की परम्परागत विधियों से हटकर सोचने की कोशिश करें। अपने साथी शिक्षकों से बातचीत करें, कि उनके बचपन या उनके क्षेत्र में किसी विशेष विषय कैसे समझाया जाता था।
 


अंकित सिंह, आनन्‍द निकेतन स्‍कूल,भोपाल
 

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