क्या घुला? क्या नहीं?

आज जब मैंने कक्षा में प्रवेश किया तो मेरे हाथ में कुछ सामग्री देखकर बच्चे जिज्ञासा से मेरी तरफ देखकर आपस में खुसर-फुसर करने लगे। कि आज शायद हम कुछ नए प्रयोग करेंगे मैम आज बहुत सारा सामान लाई हैं।

मैं आज कक्षा में पाँचवीं की आसपास पुस्तक से पाठ 7 “पानी के प्रयोग” पढ़ाने की तैयारी करके गई थी। लेकिन कक्षा 3 व चार की किताबें भी मैंने देखी हैं। कक्षा 4 में पाठ 13 “पहाड़ों से समुन्दर तक” व कक्षा 3 में “वाटर ओ वाटर” जिसमें पानी के प्रयोग, स्रोत और वह सब भी है जो कक्षा 5 में है। इसलिए सोचा क्यों न 3, 4 व 5 को एक साथ बैठाकर बहुकक्षा शिक्षण से एक पन्थ बहुत सारे काज को सार्थक करूँ। आज के कक्षा-कक्ष शिक्षण के लिए मैंने कुछ उद्देश्य तय किए। जो कि उक्त पाठ की माँग भी हैं-

  • बच्चे न घुलने व आंशिक घुलने वाली वस्तुओं पर प्रयोग करके अपनी समझ को पुख्ता कर पाएँगे व पूर्व अनुभवों से जोड़ पाएँगे।
  • पानी में कुछ चीज़ घोलने से गाढ़ा होना व गाढ़ा न होना।

घुलनशीलता  ( कक्षा : 4 व 5)  * बच्चों की संख्या: 10

इस सम्बोध को पढ़ाने हेतु दोनों कक्षाओं के बच्चों को साथ बिठाया गया। बच्चों में छह लड़के व चार लड़कियाँ हैं।

विषय का चुनाव

अपने शिक्षण के दौरान मैं यह देख लेती हूँ कि पढ़ाया जाने वाला सम्बोध क्या दोनों बाकी कक्षाओं में भी है? अगर सम्बोध बाकी कक्षाओं में भी होता है तो मैं साथ बिठाकर बहुकक्षीय शिक्षण करती हूँ। क्या घुला क्या नहीं विषय दोनों कक्षाओं के पाठ्यक्रम में है। इस सम्बोध को चयनित करने से पहले मैंने दोनों कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों का अध्ययन किया।

पाठ योजना एवं प्रक्रिया

दोनों कक्षाओं को साथ पढ़ाना मेरे लिए चुनौती भरा काम है क्योंकि बच्चे अलग-अलग बौद्धिक स्तर के हैं। मुझे बड़े बच्चों और छोटे दोनों का ध्यान रखना है। इसलिए इस सम्बोध को मनोरंजक ढंग से पढ़ाने के लिए मैंने स्वयं करके सीखना विधि को अपनाया। इस सम्बोध को पूर्ण करने हेतु मैंने कुछ उद्देश्य तय किए जिनको पाठ के अंत में आंकलन द्वारा जानने की कोशिश करूंगी कि बच्चों ने वे उद्देश्य प्राप्त किए या नहीं। यदि कुछ बच्चे इन उद्देश्यों की प्राप्ति में पीछे रह गए होंगे तो उनके लिए अलग से कार्य योजना बनाऊँगी।

आवश्यक सामग्री

इसके लिए मुझे कुछ सामग्री की ज़रूरत थी जो मैंने जुगाड़ ली :  

  • काँच के छः गिलास
  • पानी
  • मिट्टी
  • रेत
  • चीनी
  • आटा, हल्दी, नमक
  • पत्थर
  • दाल-चावल
  • चायपत्ती

इन सभी समाग्रियों के साथ मैंने बच्चों को स्वयं से सीखने के मौके देकर प्रक्रिया को शुरू किया।

उद्देश्य

  • पानी में घुलने एवं न घुलने वाली वस्तुओं को स्वयं प्रयोग कर वर्गीकृत कर पाएँगे।
  • प्रयोग कर के अपने पूर्व ज्ञान को नए ज्ञान से जोड़ सकेंगे।
  • कुछ चीज पानी में ज्‍यादा मिलाने से गाढ़ा होना व कम मिलाने से हल्का होना समझ पाएँगे।
  • कक्षा-शिक्षण व प्रयोगों के अपने व्यावहारिक जीवन से जोड़ पाएँगे।

प्रक्रिया

मैं कक्षा में बच्चों से बहुत सारी बातें करती हूँ और बातें इस तरह की जिससे सम्बोध के आसपास व नजदीक पहुँच जाएँ। इन्हीं सबसे मैं उनका पूर्व ज्ञान भी टटोलती हूँ कि जो संबोध मैं पढ़ा रही हूँ उनसे वे अवगत भी हैं या नहीं। बातों की शुरुआत आँचल ने की और पूछा कि आप आज ये काँच के गिलास क्यों लाई हैं। मैंने कहा आज हम प्रयोग करेंगे। पहले ये बताओ चाय कौन कौन पीता है? सारे बच्चों ने हाथ खड़े किए।

चाय बनानी किस किसको आती है?

सौरभ, सुष्मिता, आँचल, राधा, रोहित ने कहा उन्हें चाय बनानी आती है।

शिक्षक : सौरभ तुम बताओ चाय कैसे बनती है?

विद्यार्थी : पहले पानी और दूध उबालते हैं। फिर चीनी और चायपत्ती डालते हैं फिर चाय बन जाती है।

शिक्षक : अच्छा अब बताओ चाय का स्वाद व रंग कैसा होता है?

विद्यार्थी : रंग भूरा व स्वाद मीठा

शिक्षक : लेकिन तुमने तो दूध सफेद डाला था?

विद्यार्थी : चायपत्ती से हुआ।

शिक्षक : कैसे?

विद्यार्थी : जब उसको उबालते हैं तो चायपत्ती उसमें मिल जाती है।

शिक्षक : लेकिन चायपत्ती तो छन्नी पर आ जाती है?

विद्यार्थी : अपना रंग उसमें मिलाकर बची हुई चायपत्ती रह जाती है।

शिक्षक : मीठी कैसे हुई?

विद्यार्थी : चीनी घुल गई उसमें।

शिक्षक : अच्छा जब हम चाय गिलास में लेते हैं तो चीनी दिखती है उसमें?

विद्यार्थी : नहीं जी वह उसमें घुल जाती है।

शिक्षक : तो क्या कुछ और चीजें भी हैं जो पानी में घुलती हैं?

विद्यार्थी : जी।

शिक्षक : कौन सी चीजें हैं?

विद्यार्थी : नमक, मिट्टी, मसाला, गुड़

शिक्षक : चलो इसे हम करके देखते हैं कि क्या घुलती है क्या नहीं? आँचल आज ये काँच के गिलास इसीलिए लाए हैं। देखो इसमें हम पानी भरेंगे लेकिन आधा गिलास। गौरव सारे गिलास आधे-आधे भर दो।

बच्चे उत्‍साहित हो रहे थे। सुष्मिता ने पानी में नमक डाला और पेन के पिछले हिस्से से घोला। पूरा नमक घुल गया। बच्चे जोर से बोले गल गया। मैंने उन्हें गिलास ऊपर उठाकर दिखाया कि क्या पानी का रंग बदला?

विद्यार्थी : नहीं वैसे का वैसे ही है।

शिक्षक : नमक नहीं दिख रहा कहाँ गया होगा?

विद्यार्थी : पूरा गल गया।

बच्चों को प्रयोग करने में मजा आ रहा था। वे अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। अगले गिलास में दीपक ने आटा डाला। और फिर उसने भी पेन के पिछले हिस्से से घुमाया। हरीश ने कहा “पानी का रंग सफेद हो गया। आटा पानी में घुल गया।

शिक्षक : दीपक क्या आटा पूरा घुल गया?

विद्यार्थी : घुल गया (गिलास उठाकर देखा)।  

शिक्षक : रंग बदल गया पानी का?

विद्यार्थी : सफेद हो गया।

अब बच्चे एक-एक कर के प्रत्येक गिलास में सामग्री घोल कर देख रहे थे। स्वयं ही अवलोकन करके निष्कर्ष तक पहुँच रहे थे कि घुला या नहीं, कम घुला या पूरा घुला। सौरभ ने चीनी और दिलीप ने मिट्टी घोली गौरव ने रेत घोली मगर वह वैसी ही गिलास में दिखी।

मैनें गौरव से पूछा गौरव रेत नहीं घुली। और हिलाओ।

गौरव : (हिलाने लगा।) नहीं घुली ये नहीं घुलेगी पानी में।

सिमरन ने दाल के दाने पानी में डाले और घोलने की कोशिश करने लगी मगर वह भी नहीं घुली। सौरभ ने हल्दी डाली तो घोल का रंग पीला हो गया। सभी बच्चों ने सारी सामग्रियों को खुद से प्रयोग कर के देखा।

इसके बाद बच्चों को होम वर्क के प्रश्न दिए गए।

प्रश्न 1: क्या पानी में घुलने पर नमक दिख रहा है?

प्रश्न 2: सोचो यदि नमक व चीनी पानी में नहीं घुलती तो क्या होता?

दूसरा दिन

अगले दिन सबसे पहले होम वर्क में दिए गए प्रश्नों के उत्तर बच्चों ने मुझे दिखाए। उत्तर बहुत ही सराहनीय थे। सौरभ – नमक पानी में तो नहीं दिख रहा है लेकिन पूरा घुल गया जिससे पानी नमकीन हो गया। नमक पानी के अन्दर ही है।

      सुष्मिता : नमक पानी जैसा हो गया।

प्रश्न 2 के उत्तर

सुष्मिता : यदि चीनी नहीं घुलेगी तो पानी, जलेबी, खीर मिठाई चाय आदि नहीं बना पाएँगे। इसी के आगे लिखा है की यदि नमक पानी  नहीं घुलेगा तो सब्‍जी, दाल, कैसे बन पाएगी।

बच्चों ने उत्तर अपने अवलोकन व रोज के अनुभवों से लिखे हैं। जिनके प्रयोग वे करते हैं उनकी कल्पना करके भी लिखे हैं।

आज एक और प्रश्न दिया गया कि हमें चीनी पानी में घोलनी है तो जल्दी घोलने के लिए क्या कर सकते हैं?

सुष्मिता : दो गिलास पानी में कटोरी चीनी डाल कर उसे चम्मच से घोलेंगे।

हरीश : इससे बढ़िया तो दो बर्तन में चीनी व पानी करके उसे मिलाएँगे।

आँचल : यदि चीनी को गरम पानी में डालेंगे तो जल्दी घुलेगी।

सौरभ : चीनी को पीस देंगे फिर पानी में मिलाएँगे।

दीपक : उबलते पानी में चीनी डालेंगे और करछी से हिलाएँगे।

बच्चों को सब तरीके पता हैं। कुछ विधि तो ऐसी हैं जिनकी कल्पना भी मैंने बच्चों से नहीं की थी। जैसे चीनी को पीसेंगे। दो बर्तनों में पानी मिलाएँगे। इसके बाद बच्चों को बताया कि एक काँच के गिलास में आधा से कम पानी लो और उसमें 4 चुटकी नमक डालो। दिलीप ने चार चुटकी नमक डाला। अब गौरव को नमक की मात्रा बढ़ाने को कहा। गौरव ने दो चम्मच तक नमक डाला। अब मैंने कहा नमक की मात्रा बढ़ाते रहो। इसी बीच दीपक बोला ये तो बहुत गाढ़ा हो गया।

शिक्षक : अच्छा गाढ़ा हो गया। ये कैसे हो गया?

राधा : पानी में बहुत सारा नमक डाल दिया।

शिक्षक : तो क्या इस गाढ़े पानी को हम ऐसा बना सकते हैं कि ये पहले जैसा हो जाए।

आँचल : इसमें तो बहुत सारा पानी मिलाना पड़ेगा तब ये पतला घोल बनेगा।

शिक्षक : बिलकुल ठीक कहा आँचल ने।

रोहित : शादी में जब काले रसगुल्ले बनाते हैं जी तो उसके लिए जो मीठा पानी बनाते हैं तो उसके लिए बहुत सारी चीनी डालते हैं। वो भी बहुत गाढ़ा होता है।

शिक्षक : बिलकुल रोहित उसे चाशनी भी कहते हैं।

बच्चे अपने देखे ज्ञान को कक्षा में जोड़ पा रहे हैं। ये बहुत अच्छी बात है।

हरीश: मैम मैं चीनी का गाढ़ा घोल बनाऊँ।

हरीश गिलास में थोड़ा पानी लेकर उसमें चार पांच चम्मच चीनी घोलने लगा दीपक ने और चम्मच चीनी डालने को बोला। 5-6 मिनट घोलने पर घोल तैयार।

शिक्षक : बच्चों क्या तुमने कुछ ऐसी चीजें देखी हैं जो तुम्हें गाढ़ी दिखी हों।

सिमरन: मेरी बहन की दवाई (पीने वाली सिरप) कड़ी।

शिक्षक : आज होमवर्क में तुम्हें कुछ चीजों के नाम लिखकर दे रही हूँ। तुम्हें बताना है की ये गाढ़ी हैं या पतली।

दूध, दही, खाँसी की दवा, ओ आर एस घोल, पानी रसगुल्ले का रस, जूस, मिट्टी का तेल, घी। तालिका 2

निष्कर्ष

मैंने देखा बच्चे प्रयोग करके वस्तुओं को छूकर अवलोकन कर आनन्दित होकर सीख रहे थे। क्या घुला क्या नहीं सम्बोध में बच्चों ने स्वयं करके देखा कि क्या घुल रहा क्या नहीं। बच्चे ज्ञान को व्यावहारिक जीवन से जोड़ पा रहे थे। मुझे भी बच्चों के साथ बहुत कुछ सीखने को मिला। मैंने विद्यार्थी जीवन में जो ज्ञान सीखा है उसे यहाँ करके देखना नया अनुभव है। बच्चों को अपने आसपास बहुत कुछ सीखने को मिलता है। उनके इस सीखे ज्ञान को क्रमवार लगाना शिक्षकों का काम है।

सन्दर्भ

एन.सी.ई.आर.टी. की कक्षा 4 व 5 की ई.वी.एस. पाठ्यपुस्तक।

आई.सी.एस.सी. बोर्ड की कक्षा 4 की पुरानी पुस्तक।


श्रीमती प्रकाशी महर, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, बोंगा, भटवाड़ी, उत्तरकाशी

टिप्पणियाँ

@harrydeepti का छायाचित्र

बहुत ही अच्छा है।

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