इरफान की सूझबूझ

ब्लॉक गतिविधि केन्द्र,निवाई,टोंक में बच्चों के लिए एक बालपुस्तकालय है। इसमें 15 से 20 बच्चे प्रतिदिन आते हैं और बालपुस्तकालय की किताबें पढ़ते हैं। इन बच्चों के साथ समय-समय पर सृजनात्मक गतिविधियाँ भी हम करते हैं। इनमें बच्चों के साथ ही शिक्षक भी शामिल होते हैं। 

15 अगस्त को बच्चों के साथ मिलकर चित्रकारी और कविता लेखन करने की योजना बनाई। इसमें बच्चों के माता-पिता और कुछ शिक्षकों को बुलाने के बारे में भी सोचा था। बच्चों से कहा था कि आप लोग 15 अगस्त को दोपहर बाद आना हम लोग चित्र बनाएँगे। लेकिन बच्चे सुबह ग्‍यारह बजे से ही आना शुरू हो गए। लेकिन पुस्तकालय को बन्द देखकर वे पास में रहने वाले हमारे एक अन्य सहयोगी के घर जा पहुँचे और उनको आवाज लगाने लगे।

जब मुझे यह सूचना मिली तो मैं पुस्तकालय पहुँचा। वहाँ लगभग 30 से 35 बच्चे बाहर खड़े थे। मैंने पुस्तकालय खोला। बच्चे अन्दर आते ही चित्र बनाने के लिए सामग्री माँगने लगे। मैंने बच्चों को गोले में बिठाया और आज की योजना उनके साथ साझा की। जिसमें उनके माता-पिता को बुलाने के साथ बच्चों के बेहतर चित्रों को मढ़वाकर पुस्तकालय में लगाने की बात भी थी। इसको लेकर बच्चों में काफी उत्साह था। हमने बच्चों के साथ समूह बनाकर काम शुरू किया।

छोटे बच्चों का एक समूह था और बड़े बच्चों का एक समूह। बच्चे अपने काम में व्यस्त हो गए। काम करते हुए 10 से 15 मिनट का समय गुजरा होगा, तभी बच्चों में चर्चा शुरू हुई कि विराट कहाँ गया ? दो-तीन बच्चों ने उसे इधर-उधर देखा लेकिन वह नहीं था। विराट की उम्र लगभग 2 से 3 साल की है। वह चल सकता है लेकिन अभी बोलना उसे ठीक से नहीं आता है। वह आज अपने भाई-बहनों के साथ पुस्तकालय आया था।

बच्चों ने उसे पुस्तकालय के बाहर आसपास खोजा, वहाँ भी वह नहीं मिला। विराट के नहीं मिलने से मुझे भी चिन्ता होने लगी। मैंने उसके भाई-बहनों से कहा अपने माता-पिता को जाकर बता दो। पर वे डर के मारे जाने के लिए तैयार नहीं हुए और खुद ही खोजने का प्रयास करते रहे। मैंने भी पुस्तकालय के आसपास रहने वालों से पूछा लेकिन किसी को कुछ पता नहीं था।

मैंने एक दूसरे बड़े बच्चे को विराट के घर भेजकर उसके माता-पिता खबर करवाई। सूचना मिलते ही उनके साथ ही मोहल्ले के अन्य व्यक्ति भी आए और सभी मिलकर विराट को खोजने लगे। मोहल्ले के लोग मोटर साइकिल से और बच्चे साइकिल से उसको आसपास खोजने में लग गए। विराट की माँ पुस्तकालय में आकर रोने लगी और यह स्वाभाविक ही था। मोहल्ले की अन्य महिलाएँ भी एकत्रित हो गईं और पुस्तकालय में ही बच्चे को खोजने लगी। विराट को खोए हुए अब तक लगभग 2 घण्टे बीत चुके थे लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल पा रहा था।

लगभग दोपहर के 2 बज रहे होंगे। इरफान, जिसकी उम्र 13 साल के आसपास होगी, ने कहा कि मैं अजान वाले माईक में ऐलान करवा देता हूँ। सबको यह आइडिया ठीक लगा। इरफान के साथ कुछ बच्चे दौड़कर पास की मस्जिद में गए और ऐलान करवाया कि एक बच्चा खो गया है जिसने लाल रंग की टीशर्ट पहन रखी है। किसी को भी मिले वह उसे भगत सिंह कॉलोनी में पुस्तकालय में ले आए।

ऐलान के 20 से 25 मिनट बाद तीन बच्चे विराट की अंगुली पकड़कर लाते हुए दिखाई दिए। ये थे बच्चे साजिद, अशफाक और उनका एक साथी। तीनों की उम्र 10से 12 वर्ष के बीच की होगी। विराट को उन बच्चों के साथ आता देख, पुस्तकालय में उपस्थित बच्चों ने उसे पहचान लिया और जोर से चिल्लाए, विराट आ रहा है। इस आवाज के साथ ही हम सभी की जान में जान आई।

विराट को खोजने में इरफान की सूझबूझ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अगर वह अजान वाले माइक पर विराट के खोने की सूचना देने का सुझाव नहीं देता तो हमें शायद कुछ और घण्टे परेशान होना पड़ता।

आमतौर पर हम बच्चों को कमतर आँकते है लेकिन इरफान का सुझाव ही हमें समस्या के समाधान की ओर लेकर गया। यह सारा घटना क्रम लगभग 4 घण्टे चला। और इस तरह हम सबने एक नए अनुभव व सीख के साथ आजादी का यह पर्व 15 अगस्त 2014 मनाया।

इरफान की सूझबूझ में यह बात निहित है कि वह अपने परिवेश से अच्छी तरह परिचित है। हो सकता है उसने पहले भी ऐसी सूचनाओं का प्रसारण अजान के माइक से होता सुना हो। उसके दिमाग में यह बात भी बहुत चेतन रूप में दर्ज रही है कि उस माइक से केवल अजान ही नहीं अन्‍य सूचनाएँ भी प्रसारित की जा सकती हैं।


राकेश कारपेण्टर, स्रोत व्यक्ति, अज़ीम प्रेमजी फाउण्डेशन, गतिविधि एवं पुस्तकालय केन्द्र, निवाई,टोंक,राजस्थान

 

 

टिप्पणियाँ

pramodkumar का छायाचित्र

*इरफान  अपने परिवेश से अच्छी तरह परिचित है। उसके दिमाग में यह बात भी बहुत चेतन रूप में दर्ज रही है कि उस माइक से केवल अजान ही नहीं अन्‍य सूचनाएँ भी प्रसारित की जा सकती हैं।*बच्‍चों में समझ विकसित करने का यही बडा फायदा है कि वे ऐसी स्थितियों में स्‍वयं निर्णय ले सकते हैं । बजाय परेशान होने के वे समस्‍या के समाधान की ओर बढते हैं ।

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