अण्‍डे दिखते एक जैसे, पर हैं थोड़े ऐसे-वैसे : एक प्रयोग

मुकेश मालवीय

ये बातें मुर्गियों के अण्‍डों की हैं उन अण्‍डों की जिन्हें हिन्दी में भी पाल्ट्री फार्म के अण्‍डे कहते हैं। ये अण्‍डे दुकानों (ठेले) पर एक के ऊपर एक इस तरह रखे होते हैं कि इन्हें देर तक देखने का मन करता है। अण्‍डे केलों की तरह दर्जन के भाव में बिकते हैं। अकेले रहने वाला व्यक्ति न तो केले दर्जन भर खरीदता है न ही अण्‍डे। उन्हें दर्जन के दाम में पहले 12 का भाग देना पड़ता है फिर उसमें 2 या 4 का गुणा  करके दाम चुकाने होते हैं।

एक बार ऐसे ही अण्‍डों का हिसाब करते हुए मेरे मन में सवाल उठा कि प्रत्‍येक  अण्‍डा 6 रुपये का है तो हर 6 रुपये की तरह क्या हर अण्‍डा समान है ? और यदि सारे अण्‍डे समान नहीं हैं तो क्या फिर ‘जागो ग्राहक जागो’ की मुहिम में अण्‍डों को तुलवाकर नहीं खरीदना चाहिए ?  आप मेरे मत से सहमत नहीं हों, पर शंकित जरूर ही हो गए होंगे कि क्या इन अण्‍डों का आकार और वजन एक जैसा होता है?  वैसे आपके अन्‍दाज से कितना होना चाहिए एक तन्‍दुरुस्त अण्‍डे का वजन ?

मैं हर वर्ष की तरह 2016 में भी गरमियों में एकलव्य होशंगाबाद में विज्ञान के प्रशिक्षण में शामिल हुआ। प्रशिक्षण में इस वर्ष भी खोजबीन का सत्र था जिसमें प्रतिभागी अपने सवाल रखते हैं। इन सवालों की सूची बनाई जाती है। इस सूची के सवालों पर चर्चा,विमर्श होता है। प्राय:इन सवालों की तीन श्रेणियाँ बनती हैं। पहली में वे सवाल होते हैं जिनके जवाब पाने के लिए प्रशिक्षण के दौरान प्रयोग किए जा सकते हैं। जैसे कि क्या शुद्ध आक्सीजन में कोई जीवित रह सकता है। प्रतिभागियों के एक समूह ने चींटे को आक्सीजन से भरी परखनली में रखकर अवलोकन लिए।

सवालों की दूसरी श्रेणी में ऐसे सवाल आते हैं जिनके जवाब के लिए पुस्तकालय की  किताबें, इन्टरनेट या विशेषज्ञों से मदद लेनी होती है। जैसे यह सवाल कि जन्मान्ध व्यक्तियों को कैसे सपने आते हैं?  एक समूह चार दिनों तक इसकी खोजबीन करता रहा। तीसरे तरह के वे सवाल होते हैं जिनके उत्तर सबके पास होते हैं जैसे कि बिल्ली का रास्ता काटना क्यों अशुभ होता है ?

इस बार हमारे समूह ने जिस सवाल की नापजोख की, वह सवाल था कि क्या सभी अण्‍डों का आकार और वजन एक जैसा होता है ?

पहले हमने अपने प्रयोग की रूपरेखा तैयार की -

  • दुकान से 6 अण्‍डे लाने होंगे।
  • अण्‍डों का वजन मापने के लिए तराजू नहीं डिजीटल वजनमापी चाहिए।
  • अण्‍डों की लम्बाई-गोलाई मापने के लिए सुझाव आया कि वर्नियर कैलिपर्स होना जरूरी है।
  • एक सुझाव यह भी था कि अण्‍डों का आयतन मापना चाहिए इसके लिए नपनाघट लगेगा।

अण्‍डों को छोड़कर बाकी सभी उपकरण एकलव्य की प्रयोगशाला में उपलब्ध थे। बाजार से 6 कच्चे अण्‍डे लाए गए। अण्‍डे देखने पर लगभग एक जैसे ही दिख रहे थे। हमने नापजोख प्रारम्‍भ की। सबसे पहले हमने अण्‍डों का वजन लेना शुरू किया। इस दौरान हमें दो बातें समझ आईं। 

  • ऊपर चल रहे पंखे को बन्‍द करना चाहिए क्योंकि हमारा भारमापी बहुत सुग्राही था।
  • अण्‍डों का नामकरण करना होगा ताकि हर अण्‍डा अलग पहचाना जा सके।

तो हमने अण्‍डों को 1, 2, 3,4,5,6 नाम क्रमांक दे दिया। वजन की रीडिंग नोट कर ली गई।

अब अण्‍डों की लम्बाई और गोलाई को नापना था इसके लिए चार हाथों की जरुरत पड़ी। लम्बाई नापना थोड़ा आसान था। पर गोलाई लेने के लिए यह अण्‍डानीति बनानी पड़ी कि अण्‍डे को आड़ा रखकर वर्नियर के दोनों जबड़ों के बीच से गुजारा जाए। अण्‍डे को किसी एक जगह पर वर्नियर के दोनों जबड़ों को छूकर आरपार निकालना था। इस तरह लम्‍बे मोटे अण्‍डों के आँकड़े हमारे पास आ गए।

अब आयतन लेने की बारी थी। विचार विमर्श से यह तय हुआ कि पहले नपनाघट में पानी निश्चित माप तक भर लेते हैं फिर इसमें अण्‍डे को डुबो देंगे जितना पानी ऊपर उठेगा उसे माप लेंगे। हरेक अण्‍डों को डुबकी लगाकर आयतन लिख लिए गए।

चलिए अब देख ही लीजिए की नतीजे क्या मिले !

हमारे पास अण्‍डों से निकलीं नवजात जानकारियाँ थीं। इन आँकड़ों से हम कुछ साक्ष्‍य  आधारित निष्कर्ष पर पहुँचे इसके पहले हमारे एक साथी को शंका हुई। और शंका ने सवाल उठाया कि क्या ये सारे अण्‍डे एक ही तारीख में पैदा हुए हैं? हमें यह पता नहीं है। दुकान से लाए अण्‍डों पर यह दावा नहीं किया जा सकता। पर इस सन्‍देह के पीछे का तर्क यह था कि अण्‍डों का वजन उनकी उम्र बढ़ने के साथ कम हो सकता है ?  इसे जाँचने के लिए अगले तीन दिन तक नियत समय पर उनका वजन लिया गया।

स्‍पष्‍टीकरण : अण्‍डों का आयतन लेने के लिए छह सेन्‍टीमीटर व्यास का नापनाघट लेना पड़ा। इसकी अल्पतम माप पाँच मिलीलीटर की थी। इसलिए एक अण्‍डे को छोड़कर बाकी का आयतन हर बार 50 मिलीलीटर ही आया। अण्‍डों की लम्बाई और मोटाई की माप में कोई परिवर्तन नजर नहीं आया।

अब यह तो स्‍पष्‍ट है कि पुराने होते जाने पर अण्‍डों की सेहत गिर रही थी। एक अण्‍डे का वजन प्रतिदिन लगभग 216 मिलीग्राम कम हो रहा था। (औसत निकालने पर)

हमारे मूल सवाल के लिए यह एक स्पष्‍ट निष्कर्ष था किे अण्‍डों की कदकाठी एक जैसी होने पर भी यदि उनकी जन्मतिथि में अन्तर है तो उनके वजन में अन्‍तर  होगा।

परन्तु हमारे इन छह अण्‍डों मे कोई भी दो अण्‍डे कदकाठी में एक जैसे नहीं थे। तब हमने एक और सुझाव पर अमल किया। सुझाव था, हमारा सेम्पल कम अण्‍डों का है इसे थोड़ा और बड़ा होना चाहिए। तब हम छह अण्‍डे और लाए और उनकी पहले की तरह ही नापजोख की। पुराने अण्‍डों की 8 तारीख की माप और नए अण्‍डों की 10 तारीख की माप को साथ रखकर एक तालिका बनाई।

सभी अण्‍डों का आयतन लगभग 50 मिलीलीटर ही था इसलिए इसे तालिका में नोट नहीं किया गया।    

इस तालिका से सीधे कोई क्रमिक सहसम्‍बन्‍ध निकालना मुश्किल हो रहा था तब एक विचार आया कि अण्‍डों के वजन के बढ़ते क्रम में तालिका बनाई जाए। तालिका अंत में देखें।

इस तालिका को देखकर क्या कुछ निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं ?

अण्‍डों का औसत वजन 65.87 grm है। हमारे चार अण्‍डे लगभग 66.3 grm के हैं। अतः हम कह सकते हैं कि अण्‍डों का वजन लगभग 66grm होता है। प्रशिक्षण में उपस्थित प्रतिभागियों का अनुमान 100 grm  से  200grm  तक था।

अगर हम तालिका को मोटाई के बड़ते क्रम में जमाएँ । तालिका नीचे देखें।

हम देख सकते हैं अण्‍डों की मोटाई (अधिकतम व्यास) में ज्यादा भिन्नता नहीं है।  हमारे छह अण्‍डे लगभग 4.2 cm के हैं और पाँच अण्‍डे 4.3cm के तथा एक 4.4 cm  का। इस तरह अण्‍डों की औसत मोटाई 4.25 cm आती है।

एक निष्कर्ष और निकलता है समान मोटाई वाले अण्‍डों की लम्बाई में यदि 1mm का अन्तर है तो उनके वजन में लगभग 1grm का अन्तर आ जाएगा।

अब यदि हम तालिका को अण्‍डों की लम्बाई के बढ़ते क्रम में बनाएँ । तालिका नीचे देखें।                   

तालिका हमें बताती है कि अण्‍डों की लम्बाई 5.5 cm से 5.8 cm तक है। अगर हम इनकी लम्बाई का औसत निकालें तो यह लगभग 5.7 cm  आता है।

और एक नतीजा दिखता है कि यदि समान लम्बाई के अण्‍डों में मोटाई का 1 mm  अन्तर है तो यह अण्‍डों के वजन में लगभग 3grm  का अन्‍तर ला सकता है।

इस तरह हमशक्ल दिखने वाले अण्‍डों को अब हम थोड़ा ज्यादा जानते हैं न केवल उनके वजन के बारे में बल्कि उनकी ऊँचाई और व्यास के बारे में भी।


मुकेश मालवीय,शिक्षक, शाहपुर,बैतूल,मध्‍यप्रदेश

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pramodkumar का छायाचित्र

अण्डों के बारे में नवीन जानकारी मिली। विज्ञान के क्षेत्र में होशंगाबाद विज्ञान शिक्षण कार्यक्रम अपना व्यापक महत्व रखता है। विज्ञान को परिवेशीय समझ और संसाधनों पर केंद्रित कर आगे बढेंगे तो वह बच्चों के लिए रोचक होगा ही।

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