ग्लोब और दिकसूचक

Resource Info

बुनियादी जानकारी

भौतिक शास्‍त्र के चुम्बकत्व अध्याय में चुम्बक के एक महत्वपूर्ण गुण-उत्तर, दक्षिण दिशा बताना पर चर्चा होती है। इसी सन्‍दर्भ में दिकसूचक(कम्पास) की मदद से नाविक कैसे लम्बी-लम्बी समुद्री यात्रायें सफलतापूर्वक करते आ रहे हैं, बताया जाता है।

इसको ग्लोब पर कैसे प्रदर्शित किया जाए ! इसके लिए मैंने ग्लोब को खोलकर उसकी लोहे के तार से बनी धुरी(एक्सिस) पर इनेमल्ड तांबा वायर लपेटकर कुण्डली बना दी (चित्रानुसार) और वापिस ग्लोब को लगा दिया।

इस कुण्डली में जब सेल से विद्युतधारा प्रवाहित करते हैं तो विद्युत चुम्बक बन जाता है।

सेल को इस प्रकार समायोजित करते हैं कि ग्लोब के भौगोलिक उत्तर ध्रुव पर विद्युत चुम्बक का चुम्बकीय दक्षिण ध्रुव बने। अब ग्लोब पर कहीं भी दिकसूचक रखने पर वो ग्लोब की उत्तर दिशा की ओर इंगित करता है। इससे बच्चों को यह समझाया जा सकता है कि कम्पास की मदद से ग्लोब(पृथ्वी) पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए दिशा के बारे में किस प्रकार पता किया जाता है।


प्रस्‍तुति : महेश कुमार बसेड़िया, एकलव्‍य, होशंगाबाद

अवधि : 
(दिन )
17292 registered users
6659 resources