अगर ऐसा न होता तो क्‍या होता ?

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बुनियादी जानकारी

कभी-कभी असामान्‍य को समझना या असाधारण घटनाओं की कल्‍पना करना साधारण चीजों को समझने में हमारी मदद कर सकता है। विशेष तौर पर यह तब और भी सही होता है जब बात अपने आसपास की दुनिया - गुरुत्‍वाकर्षण, सूरज आदि....को समझने की हो।  

यह गतिविधि बताती है कि कैसे आप बच्‍चों को अपनी कल्‍पनाओं को व्‍यक्‍त करने और चित्र बनाने के लिए प्रेरित कर असाधारण परिदृश्‍यों के बारे में सोचने के लिए प्रोत्‍साहित कर सकते हैं।

 

अवधि : 
12 hours 25 mins
उद्देश्‍य : 

प्राकृतिक घटनाओं के उलट रूप का (उदाहरण के लिए: क्‍या होगा यदि पानी ना हो तो...) का प्रतिनिधित्‍व करने वाले चित्र बनाकर अपने आसपास की प्राकृतिक घटनाओं को बेहतर रूप से समझना।

  1. बच्‍चों ने जो भी अवधारणाएँ सीखी हों उनकी समझ पर चिन्‍तन करना।  
  2. “विपरीत” विषय देकर आश्‍चर्यजनक तथ्‍यों और अप्रत्‍याशित मोड़ों के माध्‍यम से रुचि पैदा करना।
  3. चित्र अवधारणाओं को गैर-भाषिक तरीके से दर्शाने में मदद करते हैं। इससे बच्‍चों को विवरणों   को ध्‍यानपूर्वक देखने को भी मिलता है।
  4. कल्‍पना करना और चित्र बनाना बच्‍चों को शब्‍दों से परे - दृश्‍यों और छवियों के रूप में सोचने के लिए प्रेरित करता है।

आवश्‍यक कौशल/पहलू:

  • विचारात्‍मक सोच
  • अवधारणाओं का इस्‍तेमाल
  • तर्क निर्माण – यदि ऐसा हो, तो, इसलिए इत्‍यादि
  • चर्चा व सवाल करना
  • वाक्‍य निर्माण व उनकी अभिव्‍यक्ति
  • दृश्‍य रूप में सोचना – जैसे चित्र
  • काल्‍पनिक स्थितियों की कल्‍पना करना व उनका चित्रण करना  
  • किसी व्‍यक्ति विशेष की अवधारणाओं, विषय-वस्‍तुओं और तर्कों की प्रस्‍तुति और उस पर सामान्‍य लोगों की जाँच व समीक्षा के लिए प्रेरित करना। 

 

 

गतिविधि चरण: 

1. बच्‍चों ने जो भी अवधारणाएँ सीखी हों उनमें से किसी एक अवधारणा के विपरीत अवधारणा से उनका परिचय कराएँ।

  • "यदि पानी न हो तो.... "
  • "यदि कल सूरज न निकले तो... "
  • "यदि गुरत्‍वाकर्षण न हो तो... "
  • "यदि मिट्टी न हो तो... "

2. लिखने के लिए उन्‍हें ए-4 माप के कागज दें। बच्‍चों को इसके आधे हिस्‍से में किसी एक विषय के बारे में वाक्‍य लिखने होंगे। बाकी आधे में आगे कुछ और काम करना होगा। सुविधा के लिए आप कागज को पहले से ही बराबर-बराबर दो भागों में मोड़ सकते हैं। (7-10 या 20 उनकी कक्षा/स्‍तर के अनुसार)

3. एक बार जब बच्‍चे यह कार्य पूरा कर लें तो उन्‍होंने जो भी लिखा हो उसकी प्रासंगिकता/वैधता को लेकर थोड़ी चर्चा करें। उनसे कहें कि अपनी धारणाओं व उसके बारे में लिखे वाक्‍यों के पीछे अपने तर्क व स्‍पष्‍टीकरण दें जैसे – "यदि गुरुत्‍वाकर्षण न हो तो क्‍या पौधे नीचे की ओर बढ़ेंगे – क्‍यों या क्‍यों नहीं?"

4. चर्चा के बाद बच्‍चों से कहें कि जो भी वो दर्शाना चाहते हैं उसका एक रफ चित्र बनाएँ। यदि जरूरत हो तो स्पष्‍टीकरण देने के लिए हर बच्‍चे से उसके चित्र व उसके दृष्टिकोण के पीछे की अवधारणा के बारे में व्‍यक्तिगत रूप से चर्चा करें।  

5. एक बार जब वो अपने रफ चित्र पूरा कर लें तो उन्‍हें ए-3 माप की ड्राइंग शीट (200 जीएसएम या इससे ज्‍यादा की) दें। चूँकि बच्‍चे कागज को थोड़ा रफ तरीके से इस्‍तेमाल करते हैं इसलिए मोटा कागज ज्‍यादा समय तक टिक सकेगा और उन्‍हें कागज को साफ रखने के लिए भी प्रेरित करेगा। अपने चित्र को अन्तिम रूप देने के लिए उन्‍हें कलर पेंसिल या पेंट भी दें।

यदि सूरज न हो... थीम पर चित्र दाएँ 

  1. जब चित्र बन जाएँ तो उनसे मुड़े हुए ए-4 माप के कागज (जिसमें उन्‍होंने अपने वाक्‍य लिखे हैं) के खाली हिस्‍से पर इन्‍हीं चित्रों के आउटलाइन वाले (आउटलाइन बनाने के लिए काले जेल पैन दें) छोटे प्रारुप बनाने को कहें।  (एक दूसरी कक्षा के बच्‍चों के साथ हमने बड़े चित्र नहीं बनवाए, सीधे छोटे कागज वाले प्रारुप ही बनवाए - बच्‍चों ने ए-4 माप के मुड़े हुए कागज में ही रंग भरा।) 
  1. एक बार जब लिखने, चित्र बनाने व उनमें रंग भरने का काम पूरा हो जाए तो फिर लेखक का नाम वगैरह अन्‍य जानकारी लिखें
  2. किसने बनाया : विद्यार्थी का नाम (मैंने इसके लिए एक कैलीग्राफी पैन का इस्‍तेमाल किया जो बच्‍चों को बहुत पसन्‍द आया - मेरे ख्‍याल से ऐसी छोटी-छोटी चीजें उन्‍हें गतिविधि को करने और ध्‍यानपूवर्क करने के लिए प्रेरित करती हैं।)
  3. अन्‍त में बच्‍चों से कहें कि अपने चित्रों को कक्षा के बाकी बच्‍चों के सामने प्रस्‍तुत करें – उनका चित्र क्‍या दर्शाता है? उन्‍होंने क्‍या बनाया है? इसके पीछे उनकी क्‍या सोच है इत्‍यादि। बाकी बच्‍चे सवाल पूछ सकते हैं और स्‍पष्‍टीकरण माँग सकते हैं।
  4. चित्र प्रस्‍तुति का यह हिस्‍सा शिक्षकों के लिए भी बेहद महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि बच्‍चों द्वारा बनाए गए चित्रों  में ऐसे बहुत सारे पहलू होंगे जो बच्‍चे की समझ व सोचने की प्रक्रिया के बारे में बताते हैं। हो सकता है कि चित्र अपने आप में वैसा ना बना हो जैसा कि बच्‍चा बनाना चाहता हो लेकिन उसके पीछे के विचार अक्‍सर काफी आकर्षक होते हैं।
  5. मुड़े हुए ए-4 कागजों को एक साथ जोड़कर एक किताब बनाई जा सकती है।
  6. बच्‍चों से अपनी किताब के लिए कवर तैयार करने को कहें।

टिप्‍पणियाँ

किताब के लिए आप दिलचस्‍प बाइंडिंग तकनीकें चुन सकते हैं जैसे कि जापानी स्‍टैब बाइंडिंग के विभिन्‍न प्रकार आदि। किताब बाइंडिंग पर की गई चर्चा से किताब बाइंडिंग करने के लिए इस्‍तेमाल होने वाली अलग-अलग सामग्रियाँ, विभिन्‍न जगहों में पाई जाने वाली ऐसी सामग्रियाँ, और इस्‍तेमाल की गई सामग्री या तकनीक की वजह आदि जानने का रास्‍ता खुलता है।

इससे जुड़ी कई अन्‍य ऐसी चर्चाएँ हैं जो कि मुख्‍य चर्चा से निकलती हैं।

उदाहरण के लिए, यदि गुरुत्‍वाकर्षण न हो चर्चा में, एक बच्‍चे ने कहा कि यदि गुरुत्‍वाकर्षण नहीं हो तो पहाड़ों का सिरा नुकीला नहीं होगा। तो इस सवाल से कुछ और सवाल निकले:  पहली स्थिति में वो तिकोने क्‍यों थे? पहाड़ों को अपना आकार कहाँ से मिलता है? पिरामिड आकृति के होने के क्‍या फायदे हैं? जैसे कि आप देख सकते हैं कि गुरूत्‍वाकर्षण पर शुरू हुई एक चर्चा ने पहाड़ कैसे बनते हैं और उनकी विशेषताओं के बारे में चर्चा का रास्‍ता खोल दिया।

एक और दिशा जिसमें इस चर्चा को ले जाया सकता था.... गुरुत्‍वाकर्षण के बिना क्‍या पौधे नीचे की ओर बढ़ेंगे? वो ऊपर की ओर क्‍यों बढ़ते हैं? पौधों को सूरज की क्‍या जरूरत है? यह सब चर्चा को प्रकाश संश्‍लेषण और हमारे जीवन में सूरज की भूमिका की ओर ले जाता है।

चित्रों व चर्चा के जरिए बच्‍चे न केवल उनके विषय में आने वाली अवधारणाओं से जुड़ेंगे बल्कि सवाल करना सीखेंगे और विषय की उनकी समझ और भी पुख्‍ता होगी।

अँग्रेजी से अनुवाद : कविता तिवारी

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